आंबेडकर वंचितों के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण के भी पक्षधर थे: हरियाणा मुख्यमंत्री
आंबेडकर वंचितों के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण के भी पक्षधर थे: हरियाणा मुख्यमंत्री
चंडीगढ़, 14 अप्रैल (भाषा) हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को कहा कि बी आर आंबेडकर न केवल वंचित वर्गों के उत्थान के प्रति चिंतित थे, बल्कि वे महिला सशक्तिकरण और शिक्षा के भी प्रबल समर्थक थे।
पंचकूला में आंबेडकर जयंती पर आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सैनी ने कहा कि बाबा साहेब का मानना था कि शिक्षा ही महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की कुंजी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज सुधारक आंबेडकर ने अपने समय में भटकती मानवता को जीवन का सच्चा मार्ग दिखाया और उनकी विरासत को सहेज कर रखना हमारी जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में उपस्थित केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि आंबेडकर की भूमिका केवल संविधान निर्माण तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने सामाजिक न्याय, समानता और अधिकारों की लड़ाई को एक नयी दिशा दी।
सैनी और मेघवाल ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी ने आंबेडकर का अपमान किया।
दोनों नेताओं ने कहा कि भारतीय संविधान के निर्माता और महान नेता होने के बावजूद बाबा साहेब को तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा बार-बार राजनीतिक उपेक्षा और अनादर का सामना करना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि 1946 में संविधान सभा के गठन के दौरान कांग्रेस ने उन्हें इसमें प्रवेश करने से रोकने की पूरी कोशिश की, लेकिन बाबा साहेब अपनी प्रतिभा और संघर्ष के बल पर वहां पहुंचे।
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें कभी सच्चे मन से स्वीकार नहीं किया।
सैनी ने आरोप लगाया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश का कानून मंत्री होने के बावजूद आंबेडकर को महत्वपूर्ण निर्णयों और समितियों से दूर रखा गया।
उन्होंने कहा, ‘विदेशी नीति, रक्षा और राष्ट्रीय महत्व जैसे अहम मामलों में उनकी भूमिका सीमित कर दी गई थी। अनुसूचित जातियों और पिछड़ा वर्ग के अधिकारों के लिए आयोग बनाने की उनकी मांग को भी कांग्रेस सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया।’
सैनी ने कहा कि सबसे बड़ा अन्याय तब हुआ जब उनके क्रांतिकारी सामाजिक सुधार ‘हिंदू कोड बिल’ को कांग्रेस ने जानबूझकर टाला और अंततः ठंडे बस्ते में डाल दिया। मुख्यमंत्री के अनुसार, बार-बार आश्वासन के बावजूद इसे लागू न करना एक बड़ा विश्वासघात था।
सैनी ने कहा कि 1951 में बाबा साहेब को कैबिनेट से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
उस समय उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनका इस्तीफा किसी पद की लालसा के कारण नहीं, बल्कि इसलिए है क्योंकि उन्होंने सिद्धांतों से समझौता करने से इनकार कर दिया था।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेताओं पर आरोप लगाया कि वे बाबा साहेब द्वारा रचित संविधान की प्रतियां लेकर चलते हैं और संविधान के खतरे में होने का दावा करते हैं, लेकिन असल में वे आज भी आंबेडकर का अनादर कर रहे हैं।
भाषा सुमित नरेश
नरेश

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