वन संरक्षण अधिनियम में संशोधन से वन प्रबंधन के निजीकरण का द्वार नहीं खुलेगा: अधिकारी

वन संरक्षण अधिनियम में संशोधन से वन प्रबंधन के निजीकरण का द्वार नहीं खुलेगा: अधिकारी

वन संरक्षण अधिनियम में संशोधन से वन प्रबंधन के निजीकरण का द्वार नहीं खुलेगा: अधिकारी
Modified Date: January 8, 2026 / 04:20 pm IST
Published Date: January 8, 2026 4:20 pm IST

नयी दिल्ली, आठ जनवरी (भाषा) पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट किया कि वन संरक्षण अधिनियम में संशोधन से वन भूमि के प्रबंधन को गैर-सरकारी निकायों के लिए नहीं खोला जाएगा, बल्कि उन्हें बस क्षतिग्रस्त वन भूमि को पुनः विकसित करने की अनुमति होगी ताकि 33 प्रतिशत वन क्षेत्र के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।

यह स्पष्टीकरण तब आया है, जब बुधवार को कांग्रेस ने आरोप लगाया कि 2023 में वन (संरक्षण) अधिनियम (एफसीए) में किए गए संशोधनों ने वन प्रबंधन के निजीकरण का रास्ता खोल दिया है।

मंत्रालय के अधिकारी ने कहा, ‘‘दिशानिर्देशों में संशोधन से गैर-सरकारी निकायों को वन भूमि के प्रबंधन का अधिकार नहीं मिल जाता है।’’

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उन्होंने कहा, ‘‘सरकार द्वारा वन संरक्षण एवं संवर्धन अधिनियम, 1980 के दिशानिर्देशों में संशोधन करने से गैर-सरकारी निकायों को क्षतिग्रस्त वन भूमि के जीर्णोद्धार में भाग लेने की अनुमति मिलेगी, जिससे भारत में 33 प्रतिशत वन क्षेत्र के महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।’’

कांग्रेस महासचिव और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के दो जनवरी के एक परिपत्र को साझा किया, जिसमें वन भूमि को पट्टे पर देने के लिए नियम और शर्तों को निर्दिष्ट करने वाले दिशानिर्देशों में संशोधन से संबंधित जानकारी दी गई है।

विपक्षी दल ने आरोप लगाया था कि इन संशोधनों से देश में वनों के प्रबंधन के लिए कानूनी व्यवस्था में व्यापक बदलाव किये गये हैं।

भाषा राजकुमार नरेश

नरेश


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