विपक्ष के विरोध के बीच सरकार ने राज्यसभा में केंद्रीय सशस्त्र बल संबंधी विधेयक पेश किया

विपक्ष के विरोध के बीच सरकार ने राज्यसभा में केंद्रीय सशस्त्र बल संबंधी विधेयक पेश किया

विपक्ष के विरोध के बीच सरकार ने राज्यसभा में केंद्रीय सशस्त्र बल संबंधी विधेयक पेश किया
Modified Date: March 25, 2026 / 05:25 pm IST
Published Date: March 25, 2026 5:25 pm IST

नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को सरकार ने विपक्ष के विरोध के बीच केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 पेश किया और सदन ने इस संबंध में विपक्ष के नोटिस को ध्वनिमत से खारिज कर दिया।

यह विधेयक पांच केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के लिए अलग-अलग सेवा नियम व्यवस्था के मौजूदा तंत्र की जगह, विभिन्न सीएपीएफ बलों में कर्मियों को नियंत्रित करने वाला एक एकीकृत कानूनी ढांचा बनाने का प्रावधान करता है।

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक पेश करते हुए इससे संबंधित चिंताओं को दूर करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, ‘सीएपीएफ धारा 312 के तहत शासन प्रणाली को प्रभावित या परिवर्तित नहीं करता है,’ उन्होंने कहा कि बलों के कर्तव्य, शक्तियां और शासन उनके मौजूदा जनादेश के तहत बरकरार रहेंगे।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने संसद के विधायी अधिकार का जोरदार बचाव किया और कहा कि संसद को कानून बनाने का अधिकार संविधान ने दिया। विपक्षी सदस्य इस बात पर बल दे रहे थे कि यह विधेयक न्यायालय में खारिज हो जाएगा।

रीजीजू ने कहा ‘हम इस सदन की विधायी क्षमता कैसे छीन सकते हैं?’

इससे पहले कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आसन से अनुरोध किया कि इस विधेयक के खिलाफ नोटिस देने वाले प्रत्येक सदस्यों को तीन से चार मिनट तक बोलने का अवसर दिया जाए।

उपसभापति हरिवंश ने प्रत्येक सदस्य को एक-एक मिनट की अनुमति दी।

तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि वह इस एक मिनट का उपयोग चुप रहकर करेंगे। उन्होंने विधेयक को ‘संघीय ढांचे के विरूद्ध बताते हुए कहा, ‘चुप्पी मेरा अधिकार है। आप मेरा अधिकार नहीं छीन सकते।’

कांग्रेस के अजय माकन ने विधेयक का विरोध करते हुए उच्चतम न्यायालय के छह फैसलों का हवाला दिया और विधेयक के कानून बन जाने के बाद इसके कार्यान्वयन के वित्तीय बोझ को रेखांकित किया।

इसी पार्टी के विवेक तन्खा ने तर्क दिया कि इस विधेयक से लगभग 13,000 सेवा अधिकारियों के संवैधानिक रूप से संरक्षित अधिकारों के ख़त्म होने का जोखिम है।

उन्होंने कहा, ‘संसद कानून बना सकती है। यह संवैधानिक अधिकार का आधार नहीं खत्म कर सकती।’

द्रमुक के तिरुचि शिवा ने कहा कि यह विधेयक उच्चतम न्यायालय के उन फैसलों को रद्द करने के लिए बनाया गया था, जिन्होंने अर्धसैनिक बलों में आईपीएस प्रतिनियुक्ति को कम कर दिया था।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के जॉन ब्रिटास ने तर्क दिया कि इस विधेयक में ‘विधायी दक्षता’’ का स्पष्ट अभाव है।

बाद में सदन ने विपक्ष के नोटिस को खारिज करते हुए इस विधेयक को पेश करने की ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।

भाषा

माधव अविनाश

अविनाश


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