भूमि अधिग्रहण के मामले में मुआवजे, ब्याज की राशि वित्तीय बोझ की मात्रा पर निर्भर नहीं हो सकती:अदालत

भूमि अधिग्रहण के मामले में मुआवजे, ब्याज की राशि वित्तीय बोझ की मात्रा पर निर्भर नहीं हो सकती:अदालत

भूमि अधिग्रहण के मामले में मुआवजे, ब्याज की राशि वित्तीय बोझ की मात्रा पर निर्भर नहीं हो सकती:अदालत
Modified Date: March 25, 2026 / 11:45 pm IST
Published Date: March 25, 2026 11:45 pm IST

नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) उचित मुआवजे की संवैधानिक गारंटी को कमजोर नहीं किये जा सकने पर जोर देते हुए उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि भूमि अधिग्रहण के मामले में मुआवजे और ब्याज की राशि वित्तीय बोझ की मात्रा पर निर्भर नहीं हो सकती है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्ज्ल भुइयां की पीठ ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की उस याचिका का निपटारा करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें शीर्ष अदालत के चार फरवरी, 2025 के फैसले को वापस लेने का अनुरोध किया गया था।

इस फैसले में शीर्ष अदालत ने कहा था कि 2019 का वह निर्णय पूर्वव्यापी रूप से लागू होगा, जिसमें एनएचएआई अधिनियम के तहत अधिग्रहित भूमि वाले किसानों को मुआवजे और ब्याज देने की अनुमति दी गई थी।

पीठ ने कहा कि भूस्वामियों को देय ब्याज भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अनुसार होगा, जो नौ प्रतिशत है, न कि एनएचएआई अधिनियम के अनुसार, जिसमें पांच प्रतिशत की सीमा है।

अदालत ने कहा कि एनएचएआई ने इस आधार पर फैसले की समीक्षा का अनुरोध किया है कि एनएचएआई द्वारा अधिग्रहित भूमि के मालिकों को मुआवजे और ब्याज से संबंधित वित्तीय देनदारी 100 करोड़ रुपये नहीं थी, जैसा कि दावा किया गया था, बल्कि लगभग 29,000 करोड़ रुपये थी।

उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को अपने आदेश में कहा कि जहां तक ​​इस दलील का संबंध है, न्यायालय ने शुरू में ही यह स्पष्ट कर दिया था कि यदि संशोधित वित्तीय अनुमान को रिकॉर्ड में ले भी लिया जाए तो भी यह उसे पूर्व के आदेश के गुण-दोष पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य नहीं करता है।

भाषा शफीक रंजन

रंजन


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