आंध्र प्रदेश विस्फोट मामले में 150 जिलेटिन की छड़ें फटने से स्थिति घातक हुई: पुलिस

आंध्र प्रदेश विस्फोट मामले में 150 जिलेटिन की छड़ें फटने से स्थिति घातक हुई: पुलिस

आंध्र प्रदेश विस्फोट मामले में 150 जिलेटिन की छड़ें फटने से स्थिति घातक हुई: पुलिस
Modified Date: April 16, 2026 / 05:03 pm IST
Published Date: April 16, 2026 5:03 pm IST

कम्मलावांडला पल्ली (आंध्र प्रदेश), 16 अप्रैल (भाषा) आंध्र प्रदेश के कम्मलावांडला पल्ली में बुधवार को हुआ विस्फोट, गैस चूल्हे में आग लगने के बाद 150 जिलेटिन की छड़ें फटने के कारण अत्यंत घातक हो गया। एक पुलिस अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

इस विस्फोट में चार लोगों की मौत हो गई थी जबकि 29 अन्य घायल हो गए। विस्फोट के कारण दो घर दो घर पूरी तरह से ढह गए जबकि चार घरों को आंशिक रूप से नुकसान पहुंचा।

श्री सत्यसाई जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) एस. सतीश ने बताया कि दो कमरों वाले घर में वेंकन्ना (55) नामक व्यक्ति चाय बना रहा था तभी गैस चूल्हे में हुई एक अजीब दुर्घटना के कारण भीषण विस्फोट हुआ।

आग कैसे लगी, इसका ब्योरा देते हुए सतीश ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘वेंकन्ना गैस चूल्हे पर चाय बना रहा था तभी चूल्हे और सिलेंडर को जोड़ने वाली पाइप टूट गई। पाइप स्टोव की तरफ से टूट गई और गैस लीक होने लगी।’’

उन्होंने बताया कि आग धीरे-धीरे और तेज होती गई, जिसके कारण गर्मी से दबाव बनने लगा और परिणामस्वरूप जिलेटिन की छड़ें एक-एक करके फट गईं।

एसपी ने बताया कि वेंकन्ना ने गैस रिसाव को नियंत्रित करने और ट्यूब को फिर से जोड़ने का प्रयास किया, लेकिन वह असफल रहा और इस प्रयास में वह घायल भी हो गया। घटना के बाद वेंकन्ना और उनके परिवार के छह अन्य सदस्य मौके से भाग गए।

पुलिस ने बताया कि उन्होंने गुलाबी डिब्बे में रखी जिलेटिन की छड़ की मौजूदगी के बारे में कोई सूचना नहीं दी।

उन्होंने कहा कि सात सदस्यीय परिवार वहां बच निकलकर भागने में सफल रहा जिसमें दो नाबालिग पोते-पोतियां भी शामिल थे। हालांकि घटना के बाद आग बुझाने के लिए वहां जुटे 50 लोग और पड़ोसी विस्फोट की चपेट में आ गए।

पुलिस के अनुसार, वेंकन्ना लगभग एक दशक पहले पड़ोसी राज्य तेलंगाना से पलायन कर आया था। वह ट्रैक्टर से जुड़ी ड्रिलिंग मशीन से बड़े-बड़े पत्थरों और चट्टानों में विस्फोट करके अपना जीवन यापन करता था और इस प्रक्रिया में चट्टानों को तोड़ने के लिए जिलेटिन की छड़ों का उपयोग करता था।

सतीश ने कहा कि वेंकन्ना जैसे श्रमिकों की जिलेटिन की छड़ तक पहुंच मुमकिन नहीं है। जिलेटिन की छड़ें आमतौर पर उन्हें सड़क परियोजनाओं और कृषि क्षेत्रों से पत्थरों को हटाने जैसे कार्यों में लगे ठेकेदार लागत के आधार पर प्रदान करते हैं।

उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में वेंकन्ना ने ऑर्डर पूरा होने के बाद कम से कम 10 से 15 शेष जिलेटिन की छड़ को एकत्र करना शुरू कर दिया, जिससे पिछले आठ से नौ महीनों में उसने लगभग 150 जिलेटिन की छड़ का अवैध रूप से भंडारण कर लिया था।

उन्होंने कहा कि अशिक्षित वेंकन्ना जिलेटिन की छड़ों से होने वाले घातक खतरे से अनजान था। उसे सिर्फ यही पता था कि जिलेटिन की छड़ों को केवल फ्यूज और डायनेमो द्वारा ही सक्रिय किया जा सकता है जबकि वास्तव में गर्मी और दबाव ने घर में हुए तत्काल विस्फोट में भूमिका निभाई थी।

सतीश ने कहा, ‘‘अत्यधिक गर्मी और उच्च आंतरिक दबाव के कारण जिलेटिन की छड़ें फट गईं। वेंकन्ना ने जिलेटिन की छड़ों के बारे में नहीं सोचा, बल्कि सिलेंडर के फटने के डर से वे भाग गए।’’

घटना के बाद पुलिस को दो जले हुए और पूरी तरह से क्षतिग्रस्त सिलेंडर भी मिले।

इस बीच, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया।

भाषा सुरभि पवनेश

पवनेश


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