आरजी कर आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे अनिकेत महतो ने डब्ल्यूबीजेडीएफ से इस्तीफा दिया

आरजी कर आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे अनिकेत महतो ने डब्ल्यूबीजेडीएफ से इस्तीफा दिया

आरजी कर आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे अनिकेत महतो ने डब्ल्यूबीजेडीएफ से इस्तीफा दिया
Modified Date: January 2, 2026 / 04:36 pm IST
Published Date: January 2, 2026 4:36 pm IST

कोलकाता, दो जनवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल के सरकारी आरजी कर अस्पताल में 2024 में एक महिला डॉक्टर से बलात्कार और हत्या के विरोध में जारी आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे अनिकेत महतो ने ‘वेस्ट बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फोरम’ (डब्ल्यूबीजेडीएफ) के न्यासी मंडल से इस्तीफा दे दिया है।

डब्ल्यूबीजेडीएफ का गठन नौ अगस्त, 2024 को सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला स्नातकोत्तर प्रशिक्षु (पीजीटी) डॉक्टर से बलात्कार और हत्या के एक दिन बाद हुआ था।

महतो ने शुक्रवार को पत्रकारों को बताया कि 37 सदस्यीय डब्ल्यूबीजेडीएफ कार्यकारी समिति के गठन को लेकर उनके और अन्य न्यासियों के बीच मतभेदों के कारण उन्होंने यह निर्णय लिया है।

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उन्होंने आरोप लगाया कि समिति के गठन की प्रक्रिया अलोकतांत्रिक थी क्योंकि न्यास के सभी सदस्यों को विश्वास में नहीं लिया गया था और यह गठन ‘‘अलोकतांत्रिक’’ एवं ‘‘अनुचित’’ था, जो आरजी कर पीड़िता के परिजनों के साथ अन्याय था। उनका मानना है कि यह कदम संस्थागत भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को मजबूत नहीं करेगा।

‘अभया’ (आरजी कर पीड़िता को दिया गया नाम) के लिए न्याय आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वालों के प्रति सत्तारूढ़ दल और प्रतिष्ठान को प्रतिशोध की भावना रखने वाला बताते हुए महतो ने कहा, ‘‘यह मंच अपने शुरुआती संघर्ष की गति को बरकरार नहीं रख सका और सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों तथा अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में व्याप्त धमकी भरे माहौल का मुद्दा अब प्रासंगिक नहीं रह गया है। मुझे मौजूदा मंच में कोई खास प्रासंगिकता नहीं दिखती, जहां मैंने कई बार अपने विचार और चिंताएं व्यक्त की हैं।’’

महतो ने कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले कई कनिष्ठ चिकित्सकों का तबादला दूरदराज के जिला अस्पतालों में कर दिया था। डॉ. देबाशीष हलदर और डॉ. अशफाकुल्ला नैय्या ने तबादलों को स्वीकार कर लिया, लेकिन केवल उन्होंने ही कलकत्ता उच्च न्यायालय और बाद में उच्चतम न्यायालय में अपने तबादलों के आदेश को चुनौती दी।

भाषा सुरभि मनीषा

मनीषा


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