‘महिला-विरोधी’ भाजपा सरकार ने जान-बूझकर महिलाओं के लिए आरक्षण में देरी की: अलका लांबा

'महिला-विरोधी' भाजपा सरकार ने जान-बूझकर महिलाओं के लिए आरक्षण में देरी की: अलका लांबा

‘महिला-विरोधी’ भाजपा सरकार ने जान-बूझकर महिलाओं के लिए आरक्षण में देरी की: अलका लांबा
Modified Date: April 21, 2026 / 04:29 pm IST
Published Date: April 21, 2026 4:29 pm IST

जयपुर, 21 अप्रैल (भाषा) अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा ने मंगलवार को आरोप लगाया कि केंद्र की ‘महिला-विरोधी’ भारतीय जनता पार्टी सरकार ने जान-बूझकर महिलाओं के लिए आरक्षण का कानून लागू करने में देरी की।

लांबा ने कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षण कानून सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पारित हो गया लेकिन सरकार लगभग 30 महीनों तक इस कानून को अधिसूचित करने में नाकाम रही।

उन्होंने यहां कांग्रेस दफ़्तर में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनावों के बीच में संसद की विशेष बैठक बुलाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश की।’

उन्होंने कहा, ‘यह महिलाओं के लिए आरक्षण के बारे में नहीं था। वह व‍िधेयक तो पहले ही पारित हो चुका है। सरकार जो लाई वह परिसीमन से सम्बद्ध है लेकिन उसे इस तरह से पेश किया गया जिससे भ्रम पैदा हो।’

लांबा ने कहा कि विपक्ष ने विशेष बैठक से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की लेकिन सरकार ने कोई प्रस्ताव नहीं दिया। उन्होंने विशेष बैठक के समय पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि संसद के कई सदस्य चुनावों के लिए प्रचार में व्यस्त थे।

उन्होंने कहा, ‘यह बैठक दोनों राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद या मॉनसून सत्र के दौरान भी की जा सकती थी। उन राज्यों के सांसदों की आवाज भी सुनी जानी चाहिए जहां चुनाव हो रहे हैं।’

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’ की भी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि यह राजनीतिक था और उन्होंने इसमें केवल विपक्ष को कोसा।

लांबा ने मांग की कि मौजूदा लोकसभा की मौजूदा 534 सीट में ही 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू किया जाए। उन्होंने दावा किया कि एकजुट विपक्ष ने सरकार को अपना एजेंडा आगे बढ़ाने से रोक दिया। उन्होंने कहा, ‘हम यह सुनिश्चित करने के लिए दबाव बनाना जारी रखेंगे कि यह कानून जल्द से जल्द लागू हो।’

लांबा ने कहा कि कांग्रेस महिलाओं के लिए आरक्षण के मुद्दे पर देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी और हस्ताक्षर अभियान चलाकर मानसून सत्र में भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपेगी।

भाषा पृथ्वी

अमित

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