रोगाणुरोधी प्रतिरोध मानवता के लिए बड़ा खतरा, इससे निपटने के लिए एक कार्ययोजना की आवश्यकता: शाह

रोगाणुरोधी प्रतिरोध मानवता के लिए बड़ा खतरा, इससे निपटने के लिए एक कार्ययोजना की आवश्यकता: शाह

रोगाणुरोधी प्रतिरोध मानवता के लिए बड़ा खतरा, इससे निपटने के लिए एक कार्ययोजना की आवश्यकता: शाह
Modified Date: January 13, 2026 / 06:19 pm IST
Published Date: January 13, 2026 6:19 pm IST

अहमदाबाद, 13 जनवरी (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) मानवता के लिए एक ‘‘बहुत बड़ा खतरा’’ है और विशेषज्ञों को इस बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए।

गुजरात जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान केंद्र की ‘बीएसएल-4 बायो-कंटेनमेंट’ प्रतिष्ठान की आधारशिला रखने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि एएमआर एक मूक आपदा है, और लोगों के बीच चिकित्सा साक्षरता, अनुसंधान एवं जागरूकता की आवश्यकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, रोगाणुरोधी प्रतिरोध तब होता है जब जीवाणु, विषाणु, कवक और परजीवी रोगाणुरोधी दवाओं के खिलाफ प्रतिरोध उत्पन्न कर लेते हैं। इससे उन पर दवाओं का कोई असर नहीं पड़ता तथा उपचार मुश्किल हो जाता है।

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शाह ने कहा, ‘‘एएमआर का अर्थ है-एंटीबायोटिक दवाओं के खिलाफ विकसित प्रतिरोधक क्षमता। यह आज हमारे समाज और मानवता के लिए एक बड़ा खतरा है। यह एक तरह से मूक आपदा है। एएमआर का अर्थ है एंटीबायोटिक दवाओं की प्रभावशीलता में कमी या पूर्ण रूप से उनका निष्प्रभावी हो जाना।’’

उन्होंने एंटीबायोटिक प्रतिरोध (एएमआर) के तीन मुख्य कारण बताए: एंटीबायोटिक दवाओं का पूरा कोर्स न लेना, चिकित्सकों द्वारा उचित निदान के बिना एंटीबायोटिक दवाएं लिखा जाना और डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग करना।

शाह ने कहा, ‘‘मेरा मानना ​​है कि एंटीबायोटिक प्रतिरोध (एएमआर) न केवल व्यक्तियों के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक गंभीर खतरा है। यदि हम एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग से मानव शरीर की मरम्मत करने की क्षमता को कमजोर करते हैं, तो हम बीमारियों को नियंत्रित नहीं कर पाएंगे। इस विज्ञान को और अधिक सटीक एवं मजबूत बनाने के लिए आगे अनुसंधान की आवश्यकता है।’’

उन्होंने कहा कि एएमआर का खतरा ‘ऊर्ध्वाधर संचरण’ तक फैला हुआ है क्योंकि यह एक गर्भवती महिला से उसके बच्चे में फैल सकता है।

गृह मंत्री ने कहा, ‘‘इसलिए, हमें एंटीबायोटिक प्रतिरोध (एएमआर) से निपटने के लिए एक रोडमैप की आवश्यकता है। हमें चिकित्सा साक्षरता और अनुसंधान की आवश्यकता है, और लोगों को इसके खतरों के बारे में शिक्षित करने की आवश्यकता है। आज मेरे सामने बैठे छात्रों का यही लक्ष्य होना चाहिए। हमारा लक्ष्य संक्रमण को रोकना और आने वाली पीढ़ियों के लिए एंटीबायोटिक दवाओं को सुरक्षित रखना भी होना चाहिए।’’

शाह ने कहा कि गुजरात बीएसएल-4 प्रतिष्ठान स्थापित करने वाला पहला राज्य बन गया है, जहां वैज्ञानिक संक्रामक विषाणुओं पर अनुसंधान कर सकते हैं।

बीएसएल-4 (बायोसेफ्टी लेवल 4) गंभीर या घातक बीमारियों का कारण बन सकने वाले उन खतरनाक और संक्रामक सूक्ष्मजीवों से निपटने के लिए जैव सुरक्षा का उच्चतम स्तर है, जिनके लिए कोई टीका या उपचार उपलब्ध नहीं है।

शाह ने कहा, ‘‘विज्ञान और प्रौद्योगिकी को केवल अनुसंधान एवं विकास तक सीमित नहीं रखना चाहिए। बल्कि, यह राष्ट्र के समग्र विकास की आधारशिला होनी चाहिए। और आज हम उस दिशा में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं। एक तरह से, पुणे में विषाणु विज्ञान संस्थान के बाद, यह भारत की दूसरी ऐसी उच्च प्रौद्योगिकी वाली प्रयोगशाला होगी।’’

उन्होंने कहा कि यह किसी राज्य सरकार द्वारा निर्मित की जा रही इस प्रकार की पहली प्रयोगशाला है और इसका श्रेय गुजरात को जाता है।

शाह ने कहा, ‘‘भारत की जैव सुरक्षा के लिए यहां 362 करोड़ रुपये की लागत से 11,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल में एक मजबूत किला तैयार किया जा रहा है।”

उन्होंने कहा कि हालांकि भारत इस क्षेत्र में कई वर्षों तक कुछ हद तक पिछड़ा रहा, लेकिन यह नयी सुविधा इस क्षेत्र में काम करने वाले युवा प्रतिभाओं को एक नया अवसर प्रदान करेगी और भारत अंततः इस क्षेत्र में आगे बढ़ेगा।

शाह ने कहा, ‘‘यह सुविधा वैज्ञानिकों को पूरी तरह से सुरक्षित वातावरण में अत्यधिक संक्रामक विषाणुओं पर अनुसंधान करने के लिए एक मंच प्रदान करेगी। यहां का बुनियादी ढांचा दुनिया भर की सर्वश्रेष्ठ बीएसएल-4 प्रयोगशालाओं का अध्ययन करने के बाद बनाया गया है।’’

भाषा नेत्रपाल पवनेश

पवनेश


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