अहोम राजवंश की राजधानी संकुल को यूनेस्को विरासत का दर्जा दिलाने के लिए आवेदन किया गया: हिमंत
अहोम राजवंश की राजधानी संकुल को यूनेस्को विरासत का दर्जा दिलाने के लिए आवेदन किया गया: हिमंत
गुवाहाटी, पांच सितंबर (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि छह शताब्दियों तक वर्तमान असम के बड़े हिस्से पर शासन करने वाले अहोम राजवंश की राजधानी रहे रंगपुर-शिवसागर संकुल को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए भारत ने आवेदन किया है।
यह नामांकन अहोम काल की एक और धरोहर स्थल, ‘चराईदेव मोइदम’ को यूनेस्को से मान्यता मिलने के बाद आया है।
शर्मा ने शुक्रवार देर रात सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि छह सदियों तक ब्रह्मपुत्र घाटी पर निर्बाध शासन करने वाले अहोम राजवंश की राजधानी रंगपुर-शिवसागर संकुल को यूनेस्को विश्व विरासत का दर्जा दिलाने के लिए भारत ने औपचारिक रूप से मानदंड (तृतीय) और (चतुर्थ) के तहत आवेदन किया है।
मानदंड तृतीय के अनुसार किसी ऐसी सांस्कृतिक परंपरा या सभ्यता का अनोखा या कम से कम असाधारण प्रमाण होना चाहिए जो या तो अब भी मौजूद है या फिर खत्म हो चुकी है। वहीं मानदंड चतुर्थ के अनुसार किसी ऐसी इमारत, वास्तु या तकनीकी ढांचे या भूदृश्य का बेहतरीन उदाहरण होना चाहिए जो मानव इतिहास के किसी महत्वपूर्ण चरण को दर्शाता हो।
शर्मा ने बताया कि भारत की ओर से नामांकित किए गए इस परिसर में असम के ‘सबसे बेहतरीन अहोम मंदिर, महल, पानी के टैंक और इंजीनियरिंग के शानदार नमूने मौजूद हैं’ – जिनमें एशिया का सबसे पुराना बचा हुआ ‘रंग घर’ भी शामिल है।
उन्होंने कहा, ेग‘‘यह 2024 में यूनेस्को द्वारा ‘चराईदेव मोइदाम’ को मिली अहम मान्यता पर आधारित है। ये दोनों जगहें मिलकर अहोम राजवंश की कहानी पूरी करती हैं, जहां यह राजवंश के सदस्यों का आरामगाह था और जहां इसने शासन किया।’’
मुख्यमंत्री ने साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्होंने ‘‘असम की विरासत को वह वैश्विक पहचान दिलाने के लिए अभूतपूर्व प्रयास किया है, जिसकी वह हकदार है।’’
अहोम राजवंश की स्थापना 1228 में स्वर्गदेव चाओलुंग सुकाफा ने की थी और इसका शासन 1826 में समाप्त हुआ।
भाषा धीरज शोभना
शोभना

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