राम मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी पद के लिए आवेदन आमंत्रित, 18 जुलाई अंतिम तिथि

राम मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी पद के लिए आवेदन आमंत्रित, 18 जुलाई अंतिम तिथि

राम मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी पद के लिए आवेदन आमंत्रित, 18 जुलाई अंतिम तिथि
Modified Date: July 13, 2026 / 05:04 pm IST
Published Date: July 13, 2026 5:04 pm IST

अयोध्या, 13 जुलाई (भाषा) श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अयोध्या स्थित राम मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद के लिए सोमवार को आवेदन आमंत्रित किए। ट्रस्ट ने आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 18 जुलाई निर्धारित की है।

ट्रस्ट ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी एक पोस्ट में कहा कि अंतिम तिथि को अपराह्न चार बजे तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।

यह नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि मंदिर के चढ़ावे के कथित गबन के आरोपों के बाद ट्रस्ट ने अपने प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने के उद्देश्य से इस पद का सृजन किया है।

ट्रस्ट द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सीईओ की नियुक्ति प्रारंभिक तौर पर तीन वर्ष के अनुबंध पर की जाएगी, जिसे संतोषजनक कार्य निष्पादन के आधार पर बढ़ाया जा सकेगा।

अधिसूचना में कहा गया है कि नियुक्ति अयोध्या में होगी, जबकि वेतन और अन्य सेवा शर्तें आपसी सहमति से तय की जाएंगी।

ट्रस्ट ने इस पद के लिए किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री, 50 से 70 वर्ष की आयु तथा किसी बड़े सार्वजनिक संगठन, संस्थान, सरकारी विभाग या कंपनी में कम से कम 20 वर्ष के प्रबंधकीय अनुभव को अनिवार्य योग्यता निर्धारित किया है।

उम्मीदवार को प्रशासन, वित्त, लेखा, मानव संसाधन, जनसंपर्क, सूचना प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और विधिक मामलों के संचालन का अनुभव होना चाहिए।

अधिसूचना में कहा गया है, ‘‘मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के रूप में कार्य करने वाले अथवा किसी मंदिर या हिंदू धार्मिक संस्था के प्रबंधन का अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को वरीयता दी जाएगी। पात्रता पूरी करने वाले सेवानिवृत्त अधिकारी भी आवेदन कर सकते हैं।’’

ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आवेदक का ‘‘सक्रिय रूप से हिंदू धर्म का पालन करने वाला’’ होना अनिवार्य है, जबकि वैष्णव परंपरा से जुड़े भगवान राम के भक्त को वांछनीय माना जाएगा।

अधिसूचना के अनुसार, उम्मीदवार को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं का कार्यसाधक ज्ञान होना भी अनिवार्य है।

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने रविवार को कहा था कि पहले सीईओ की जिम्मेदारियां और अधिकार ट्रस्ट स्वयं तय करेगा तथा ट्रस्ट या सीईओ के कामकाज में सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।

उन्होंने कहा था, ‘‘सीईओ की प्राथमिक जिम्मेदारी ट्रस्ट के प्रति श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखना होगी।’’

मिश्र ने कहा था कि सीईओ मंदिर की वित्तीय व्यवस्था की निगरानी करेगा, अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करेगा तथा ट्रस्ट के सहयोगी के रूप में कार्य करेगा। हालांकि, वह ट्रस्ट के प्रति जवाबदेह रहेगा।

उन्होंने यह भी कहा था कि ट्रस्ट यह तय करेगा कि सीईओ को कितने अधिकार सौंपे जाएं। सीईओ को अपने कार्यालय के संचालन के लिए आवश्यक कर्मचारियों की नियुक्ति की स्वतंत्रता होगी, लेकिन समग्र प्रशासनिक नियंत्रण ट्रस्ट के पास रहेगा।

अधिसूचना के अनुसार, सीईओ ट्रस्ट के महासचिव को रिपोर्ट करेगा और संगठन के वैधानिक, प्रशासनिक तथा वित्तीय कार्यों के लिए उत्तरदायी होगा।

सीईओ संस्थागत व्यवस्थाओं, संगठनात्मक विकास, नियामकीय अनुपालन, वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता, ट्रस्ट की परिसंपत्तियों के प्रबंधन तथा न्यासी बोर्ड द्वारा स्वीकृत नीतियों के क्रियान्वयन की भी निगरानी करेगा।

उसकी प्रमुख जिम्मेदारियों में धार्मिक अनुष्ठानों, पर्वों और आयोजनों का सुचारु संचालन सुनिश्चित करना, स्थानीय, राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करना, विशिष्ट अतिथियों एवं संतों के लिए व्यवस्थाएं करना तथा सनातन परंपराओं को बढ़ावा देते हुए ट्रस्ट की प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करना शामिल होगा।

इस महीने की शुरुआत में ट्रस्ट ने इस पद के लिए प्राप्त आवेदनों की जांच और उपयुक्त उम्मीदवारों की अनुशंसा के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और एनआईटी रायपुर के पूर्व अध्यक्ष सुरेश हावरे की तीन सदस्यीय समिति गठित की थी।

मिश्र ने यह भी स्पष्ट किया था कि वह इस चयन समिति का हिस्सा नहीं होंगे। उन्होंने कहा था कि 22 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में शामिल होने का निर्णय वह बैठक का एजेंडा देखने के बाद करेंगे।

उन्होंने कहा था कि मंदिर निर्माण से जुड़े समिति के सदस्य ट्रस्ट में पदेन सदस्य हैं और उन्हें मतदान का अधिकार प्राप्त नहीं है।

भाषा

जफर, मनीष रवि कांत


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