अल फलाह विश्वविद्यालय चेयरमैन जव्वाद सिद्दीकी का ईडी के मामलों में अंतरिम जमानत का अदालत से अनुरोध
अल फलाह विश्वविद्यालय चेयरमैन जव्वाद सिद्दीकी का ईडी के मामलों में अंतरिम जमानत का अदालत से अनुरोध
नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) धनशोधन के दो मामलों में न्यायिक हिरासत में बंद अल फलाह विश्वविद्यालय समूह के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से उन्हें अंतरिम जमानत पर रिहा करने की अपील की।
सिद्दीकी ने अपनी पत्नी के कैंसर के इलाज का हवाला देते हुए न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी से कहा कि अंतरिम जमानत की शर्त के तौर पर वह जीपीएस ट्रैकर बैंड पहनने के लिए भी तैयार हैं।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के वकील ने दोनों मामलों में दायर अंतरिम जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए आशंका जतायी कि रिहा होने पर सिद्दीकी साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकते हैं और कानूनी प्रक्रिया से बच सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि इसके बजाय सिद्दीकी को हिरासत पैरोल पर पत्नी से मिलने की अनुमति दी जा सकती है।
हालांकि, सिद्दीकी का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम चौधरी ने कहा कि उनके मुवक्किल की पत्नी की हालत गंभीर है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं (सिद्दीकी) जीपीएस ट्रैकर पहनने के लिए (भी) तैयार हूं।’’
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति बनर्जी ने फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मैं आदेश पारित करूंगा।’’
निचली अदालत द्वारा नौ जून को राहत देने से इनकार किए जाने के बाद सिद्दीकी ने छह सप्ताह की अंतरिम जमानत के अनुरोध के साथ उच्च न्यायालय का रुख किया।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि सिद्दीकी अपनी पत्नी के जीवन के इस कठिन दौर में उनके साथ रहना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी ओवेरियन कैंसर से पीड़ित हैं और यह चौथे चरण में है। चौधरी ने कहा कि उनकी (सिद्दीकी की पत्नी) कीमोथेरेपी 15 जुलाई को निर्धारित है।
ईडी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जोहेब हुसैन ने इन दावों के ‘‘मूल तथ्यों’’ पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिद्दीकी की पत्नी का उपचार सकारात्मक रूप से असर कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि उनकी पत्नी की हालत वास्तव में जीवन के लिए खतरा उत्पन्न करने वाली होती, तो उनके बच्चे विदेश से भारत लौट आये होते। उन्होंने कहा, ‘बच्चों में से कोई भी भारत वापस नहीं आया है। कोई भी नहीं लौटा।’
हुसैन ने यह भी कहा कि सिद्दीकी आदतन अपराधी हैं और वर्ष 2025 के लाल किला विस्फोट मामले में भी शामिल हैं। हालांकि, सिद्दीकी के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल लाल किला विस्फोट मामले की प्राथमिकी (एफआईआर) या आरोपपत्र में आरोपी नहीं हैं।
सिद्दीकी को धनशोधन के दो मामलों में गिरफ्तार किया गया है। इनमें से एक मामला फरीदाबाद स्थित उनके शैक्षणिक संस्थान के छात्रों से ली गई फीस के जरिये कथित रूप से अवैध धन अर्जित करने से जुड़ा है।
धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज इस मामले में उन्हें 18 नवंबर, 2025 को गिरफ्तार किया गया था।
ईडी की जांच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा द्वारा दर्ज दो प्राथमिकी पर आधारित है, जिनमें आरोप लगाया गया है कि अल फलाह विश्वविद्यालय ने छात्रों और अभिभावकों को गुमराह करने के लिए स्वयं को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) से मान्यता प्राप्त होने का झूठा दावा किया तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से मान्यता प्राप्त संस्थान के रूप में खुद को प्रस्तुत किया।
ईडी का आरोप है कि विश्वविद्यालय ने वर्ष 2018 से 2025 के बीच 415.10 करोड़ रुपये अर्जित किए और छात्रों से वसूली गई धनराशि का निजी हितों के लिए दुरुपयोग किया।
इसके बाद ईडी ने दिल्ली में 45 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन के कथित फर्जी अधिग्रहण से जुड़े एक अन्य धनशोधन मामले में भी सिद्दीकी को गिरफ्तार किया।
अल फलाह विश्वविद्यालय ‘सफेदपोश आतंकवादी नेटवर्क’ जांच के दायरे में भी आया था, जिसमें उससे जुड़े दो चिकित्सकों को गिरफ्तार किया गया था। वहीं, उसके अस्पताल से संबद्ध एक अन्य चिकित्सक उमर-उन-नबी की पहचान 10 नवंबर, 2025 को लाल किले के बाहर हुए आत्मघाती विस्फोट के हमलावर के रूप में की गई थी। इस विस्फोट में 15 लोगों की मौत हुई थी।
भाषा अमित सुरेश
सुरेश

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