असम चुनाव में वन रक्षकों की नियुक्ति ‘चिंताजनक’ : वन्यजीव संरक्षणवादी

असम चुनाव में वन रक्षकों की नियुक्ति ‘चिंताजनक’ : वन्यजीव संरक्षणवादी

असम चुनाव में वन रक्षकों की नियुक्ति ‘चिंताजनक’ : वन्यजीव संरक्षणवादी
Modified Date: March 29, 2026 / 10:12 pm IST
Published Date: March 29, 2026 10:12 pm IST

नयी दिल्ली, 29 मार्च (भाषा) पूर्व नौकरशाहों और वन्यजीव संरक्षणवादियों के एक समूह ने असम सरकार के पर्यावरण विभाग के उस आदेश को वापस लेने की मांग की है, जिसमें राज्य में अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए असम वन सुरक्षा बल (एएफपीएफ) के करीब 1600 कर्मियों को तैनात करने की बात कही गई है।

अधिकारियों ने एक खुले पत्र में कहा है कि एएफपीएफ की तैनाती न केवल वन और वन्यजीव संरक्षण को कमजोर करेगी, बल्कि स्थापित कानूनी और प्रशासनिक मानदंडों का सीधा उल्लंघन भी करेगी।

पत्र में कहा गया, ‘‘ निर्वाचन आयोग के स्पष्ट दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रादेशिक वन बलों और सेवारत वन अधिकारियों, जिनमें वरिष्ठ भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारी भी शामिल हैं, को चुनाव संबंधी कार्यों के लिए नहीं बुलाया जाना चाहिए।’’

केरल की पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) प्रकृति श्रीवास्तव द्वारा लिखित इस पत्र पर पर्यावरण मंत्रालय की पूर्व सचिव मीना गुप्ता, महाराष्ट्र के पूर्व पीसीसीएफ डॉ. ए के झा, उत्तर प्रदेश के पूर्व पीसीसीएफ डॉ. उमा शंकर सिंह, राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की पूर्व सदस्य प्रेरणा सिंह बिंद्रा और वन्यजीव संरक्षणवादी देवादित्य सिन्हा ने भी हस्ताक्षर किए हैं।

पत्र में 2024 के उच्चतम न्यायालय के उस आदेश का भी हवाला दिया गया है, जिसमें वन अधिकारियों और विभागीय वाहनों को चुनाव में तैनाती से छूट दी गई थी।

भाषा धीरज दिलीप

दिलीप


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