दो परिवहन अवसंरचना परियोजनाओं को मंजूरी से रेल, सड़क संपर्क में सुधार होगा: प्रधानमंत्री मोदी

दो परिवहन अवसंरचना परियोजनाओं को मंजूरी से रेल, सड़क संपर्क में सुधार होगा: प्रधानमंत्री मोदी

दो परिवहन अवसंरचना परियोजनाओं को मंजूरी से रेल, सड़क संपर्क में सुधार होगा: प्रधानमंत्री मोदी
Modified Date: April 9, 2025 / 08:43 pm IST
Published Date: April 9, 2025 8:43 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि तिरुपति-पाकला-कटपडी रेल लाइन के दोहरीकरण के उनकी सरकार के फैसले से आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों के लिए रेल संपर्क में सुधार होगा तथा माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी।

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में तिरुपति-पाकला-कटपडी एकल रेल लाइन खंड (104 किलोमीटर) के दोहरीकरण को मंजूरी दी, जिस पर कुल 1,332 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

तिरुपति-पाकला-कटपडी खंड कोयला, कृषि उपज, सीमेंट और विभिन्न खनिजों के परिवहन के लिए एक अहम मार्ग है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि छह लेन वाले जीरकपुर बाईपास के निर्माण को मंत्रिमंडल की मंजूरी से हिमाचल प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के बीच सड़क संपर्क में सुधार होगा।

मोदी ने कहा, “जीरकपुर बाईपास के निर्माण का फैसला एक निर्बाध और भविष्य के लिए तैयार परिवहन बुनियादी ढांचा विकसित करने के हमारे ‘‘प्रधानमंत्री गतिशक्ति’’ प्रयासों के अनुरूप है।”

उन्होंने कहा कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य पटियाला, दिल्ली और मोहाली एयरोसिटी से यातायात को मोड़कर और हिमाचल प्रदेश के लिए सीधा संपर्क प्रदान करके जीरकपुर, पंचकूला और आसपास के क्षेत्रों में भीड़भाड़ को कम करना है।

प्रधानमंत्री ने कमान क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन (एम-सीएडीडब्ल्यूएम) के आधुनिकीकरण को मंजूरी देने के फैसले की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा मिलेगा और लोग नवीनतम प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को प्रोत्साहित होंगे।

मोदी ने कहा, “इससे पानी के इस्तेमाल की क्षमता बढ़ेगी, उत्पादकता में सुधार होगा और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।”

एम-सीएडीडब्ल्यूएम योजना का मकसद निर्दिष्ट क्लस्टर में नहरों या अन्य स्रोतों से सिंचाई जल की आपूर्ति के मौजूदा नेटवर्क का आधुनिकीकरण करना है।

भाषा पारुल सुरेश

सुरेश


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