कला केवल एक सौंदर्यपरक चीज नहीं है, इसका वास्तविक प्रभाव हो सकता है : कलाकार इब्राहिम महामा

कला केवल एक सौंदर्यपरक चीज नहीं है, इसका वास्तविक प्रभाव हो सकता है : कलाकार इब्राहिम महामा

कला केवल एक सौंदर्यपरक चीज नहीं है, इसका वास्तविक प्रभाव हो सकता है : कलाकार इब्राहिम महामा
Modified Date: February 14, 2026 / 06:37 pm IST
Published Date: February 14, 2026 6:37 pm IST

(फोटो के साथ)

(मनीष सैन)

नयी दिल्ली, 14 फरवरी (भाषा) सामाजिक-राजनीतिक जागरुकता फैलाने वाली कलाकृतियों के लिए पहचाने जाने वाले घाना के समकालीन कलाकार इब्राहिम महामा का मानना ​​है कि एक कलाकार का यह दायित्व है कि वह उस दुनिया पर विचार करे जिसमें वह खुद को पाता है।

उन्होंने कहा कि कला केवल एक सौंदर्यपरक चीज नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक प्रभाव हो सकता है।

पिछले साल दिसंबर में कोच्चि-मुजिरिस द्विवार्षिक प्रदर्शनी में अपने सशक्त राजनीतिक संदेश वाली कलाकृति ‘पार्लियामेंट ऑफ घोस्ट्स’ के लिए उन्हें कला जगत में खासा सराहा गया था। महामा पिछले सप्ताह दिल्ली में आयोजित ‘17वें इंडिया आर्ट फेयर’ में अवसरों तक पहुंच, जवाबदेही और सामाजिक असमानता जैसे विषयों पर एक परिचर्चा को संबोधित करने पहुंचे थे।

महामा (38) ने कला मेले से इतर ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि कला केवल एक सौंदर्यपरक वस्तु होनी चाहिए। मेरा मानना ​​है कि कला का हमारे आस-पास की दुनिया पर वास्तविक प्रभाव हो सकता है। हम इसमें केवल सौंदर्यपरक या प्रतीकात्मक दृष्टिकोण से ही शामिल नहीं हैं, यह प्रतीकात्मकता से परे है और यहीं पर मैं कलाकारों की जिम्मेदारी की बात करता हूं।’’

महामा ने एक अन्य कलाकार कुलप्रीत सिंह के स्टॉल का दौरा किया, जो अपनी कलाकृतियों के माध्यम से सामाजिक मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए जाने जाते हैं।

‘इंडिया आर्ट फेयर’ में सिंह की प्रदर्शनी में लुप्तप्राय और विलुप्त प्रजातियों के रंगीन चित्र प्रदर्शित किए गए, जो जलवायु संकट और किसानों पर इसके प्रभाव को दर्शाते हैं।

महामा ने कहा कि उनका अपना स्टूडियो चमगादड़ों और अन्य पशुओं की प्रजातियों के लिए एक ‘‘अभयारण्य’’ है, क्योंकि उनका मानना ​​है कि कला का उपयोग ‘‘दुनिया को पुनर्जीवित करने’’ के लिए किया जा सकता है।

अपने स्टूडियो को डिजाइन करते समय, महामा ने दीवारों में खाली जगह छोड़ दी थी, जो अब ‘‘हजारों चमगादड़ों’’ का घर है।

घाना के कलाकार ने कहा कि भले ही अधिकतर कला अब भी संस्थानों और संग्रहालयों के विचार से बंधी हुई है, लेकिन उम्मीद है कि कलाकार अब ‘‘आधुनिकतावादी सोच से दूर, आधुनिक कलाओं से दूर’’ कुछ अलग करने के बारे में सोच रहे हैं।

भाषा शफीक जोहेब

जोहेब


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