नयी दिल्ली, 21 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को फैसला सुनाया कि राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय का ‘विजिटर’ होने के नाते राष्ट्रपति विश्वविद्यालय के प्रथम रजिस्ट्रार के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने और उनकी सेवा समाप्त करने के लिए अधिकृत हैं।
इसके साथ ही उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस फैसले को रद्द कर दिया जिसमें कहा गया था कि ऐसी कार्रवाई अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने उच्च न्यायालय के उस फैसले से असहमति जताई जिसमें कहा गया था कि राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय (आरजीएनएयू) के कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करना ‘विजिटर’ और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
यह मामला आरजीएनएयू के प्रथम रजिस्ट्रार जितेंद्र सिंह से संबंधित है।
आरजीएनएयू कानून के संक्रमणकालीन प्रावधानों के तहत 2019 में नियुक्त सिंह का कार्यकाल मुकदमों से भरा रहा। उनकी सेवा को शुरू में 2020 में परिवीक्षा अवधि के दौरान समाप्त कर दिया गया था। इसके बाद मुकदमों की एक श्रृंखला शुरू हुई।
उच्च न्यायालय ने दिसंबर 2021 में उन्हें बहाल कर दिया लेकिन उसी दिन एक नयी जांच लंबित रहने तक उन्हें निलंबित कर दिया गया।
जांच समिति की रिपोर्ट में अनुशासनहीनता और घोर अवज्ञा के आरोप सिद्ध होने के बाद ‘विजिटर’ के रूप में राष्ट्रपति ने अप्रैल 2022 में उनकी बर्खास्तगी को मंजूरी दे दी।
भाषा अविनाश संतोष
संतोष