अशोक खेमका को भविष्य के कार्यों के लिए पैनल में शामिल अतिरिक्त सचिव के रूप में माना जाए: अदालत

अशोक खेमका को भविष्य के कार्यों के लिए पैनल में शामिल अतिरिक्त सचिव के रूप में माना जाए: अदालत

अशोक खेमका को भविष्य के कार्यों के लिए पैनल में शामिल अतिरिक्त सचिव के रूप में माना जाए: अदालत
Modified Date: June 6, 2026 / 10:30 pm IST
Published Date: June 6, 2026 10:30 pm IST

चंडीगढ़, छह जून (भाषा) पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी अशोक खेमका को भविष्य में अतिरिक्त सचिव के रूप में शामिल किया जाए। यह फैसला हरियाणा कैडर के 1991 बैच के अधिकारी अशोक खेमका की याचिका पर आया है।

खेमका में याचिका में दलील दी थी कि उन्हें भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव या सचिव के रूप में नियुक्त नहीं किया गया क्योंकि उप सचिव और उससे ऊपर के स्तर पर कम से कम तीन साल तक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर काम करने की अर्हता पूरी नहीं हुई थी।

उन्होंने दलील दी कि भारत सरकार में उपसचिव और उससे ऊपर के रैंक पर प्रतिनियुक्ति का अनुभव नहीं होने के बावजूद कई आईएएस अधिकारियों को अतिरिक्त सचिव के रैंक पर नियुक्त किया गया था।

खेमका ने जुलाई 2023 में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण द्वारा पारित तीन आदेशों को चुनौती दी थी, जिनमें उन्हें उनकी सेवानिवृत्ति की तिथि से पहले भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव/सचिव के स्तर पर पैनल में शामिल मानने के अनुरोध को खारिज कर दिया गया था।

अपनी ईमानदारी के लिए मशहूर खेमका 30 अप्रैल, 2025 को सेवानिवृत्त हुए। लगभग 34 वर्षों के करियर में उनका 57 बार तबादला हुआ।

वह 2012 में उस समय राष्ट्रीय सुर्खियों में आए, जब उन्होंने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाद्रा से जुड़े गुरुग्राम भूमि सौदे के दाखिल खारिज को रद्द कर दिया।

दाखिल खारिज किसी जमीन के स्वामित्व के हस्तांतरण की प्रक्रिया का एक हिस्सा है।

न्यायमूर्ति हरसिमरन सिंह सेठी और दीपक मनचंदा की पीठ ने खेमका की याचिका स्वीकार करते हुए फैसला सुनाया कि याचिकाकर्ता को अन्य समान पदस्थ अधिकारियों के बराबर दर्जा दिया जाना चाहिए ताकि उन्हें कोई नुकसान न हो। अदालत ने कहा कि विचारणीय एकमात्र प्रश्न यह है कि क्या याचिकाकर्ता को अतिरिक्त सचिव/सचिव के पद पर केंद्र सरकार के पैनल में शामिल होने का लाभ दिया जा सकता है, जबकि पात्रता खंड में यह शर्त है कि ऐसा लाभ केवल उसी आईएएस अधिकारी को दिया जा सकता है, जिसने कम से कम तीन वर्षों तक उपसचिव या उससे ऊपर के पद पर प्रतिनियुक्ति पर सरकार के साथ सेवा की हो।

अदालत ने 29 मई को जारी आदेश में कहा, “हालांकि नियमों में पात्रता संबंधी योग्यताएं निर्धारित हैं, फिर भी भारत सरकार किसी पात्र अधिकारी को उक्त लाभ प्रदान करते समय इस नियम में छूट दे सकती है। भारत सरकार ने पहले भी इसी प्रकार की स्थिति वाले आईएएस अधिकारियों को कई बार यह छूट दी है।”

भाषा जितेंद्र माधव

माधव


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