नयी दिल्ली, 27 सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने रविवार को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल को “हिंदू स्वाभिमान” को जागृत करने वाला एक “प्रमुख व्यक्ति” बताया और उनके जीवन से प्रेरणा लेते हुए देश में ‘राम राज्य’ की स्थापना के लिए काम करने का आह्वान किया।
होसबाले ने कहा, “अशोक सिंघल जी व्यक्तित्व, उपलब्धि और नेतृत्व की ‘त्रिवेणी’ थे। वह संगठन, संघर्ष और समन्वय का संगम थे। वह सादगी, कड़ी मेहनत और अनुशासन का संगम थे। वह ज्ञान, भक्ति और कर्म का संगम थे।”
होसबाले दिल्ली के ‘भारत मंडपम’ परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, जिसके साथ ही सिंघल की जन्म शताब्दी मनाने और विहिप के पूर्व अध्यक्ष के “अधूरे कामों” को आगे बढ़ाने के लिए देश-विदेश में साल भर चलने वाले कार्यक्रमों की शुरुआत हो गई।
होसबाले ने कहा कि सिंघल में दो गुण स्पष्ट रूप से मौजूद थे-“निडरता और विनम्रता।”
उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन में सिंघल की भूमिका से दुनिया वाकिफ है और विहिप नेता की सारी कोशिशें “हिंदू स्वाभिमान को जगाने” पर केंद्रित थीं।
आरएसएस में नंबर-दो की हैसियत रखने वाले होसबाले ने कहा, “हिंदू स्वाभिमान की इस जागृति और हम सबके साझा सपनों को पूरा करने की दिशा में एक प्रमुख व्यक्ति के सम्मान के तौर पर हमें ‘राम राज्य’ की स्थापना के लिए अटूट संकल्प के साथ काम करते रहना होगा। तभी हम अशोक सिंघल जी को सच्ची श्रद्धांजलि दे पाएंगे।”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
आगरा में 27 सितंबर 1926 को जन्मे सिंघल 1942 से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए थे। 1950 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के प्रौद्योगिकी संस्थान से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह आरएसएस के पूर्णकालिक प्रचारक बने और बाद में दिल्ली तथा हरियाणा के प्रांत प्रचारक के तौर पर काम किया।
सिंघल को 1980 में विहिप में भेजा गया, जहां उन्होंने इसके संयुक्त महासचिव का पद संभाला। 1984 में वह विहिप के महासचिव बने और बाद में संगठन के अध्यक्ष पद पर सेवाएं दीं। वह दिसंबर 2011 तक इस पद पर रहे।
सिंघल ने 1980 के दशक के आखिर और उसके बाद के वर्षों में राम जन्मभूमि आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी। उनका 17 नवंबर 2015 को गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया था।
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पारुल नरेश
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