नयी दिल्ली, 27 सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) ने उन मतदाताओं के घरों का दौरा शुरू कर दिया है, जिन्हें नाम और दस्तावेजों के मिलान (मैपिंग) सहित अन्य विसंगतियों के लिए नोटिस जारी किए गए हैं।
निर्वाचन आयोग (ईसी) ने यह पहल जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान लोगों को हो रही परेशानियों को लेकर आलोचना का सामना करने के बाद की है।
निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को कहा कि बीएलओ का ‘‘घर-घर’’ जाकर दौरा तब तक जारी रहेगा, जब तक सभी नोटिस का निपटारा नहीं हो जाता। मसौदा मतदाता सूची में शामिल मतदाताओं को उनके गणना प्रपत्रों में कमियों के कारण नोटिस जारी किए गए हैं।
दिल्ली में करीब 33 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें नाम या अन्य छोटी-मोटी अथवा सतही विसंगतियों से जुड़े मामले भी शामिल हैं। इसे लेकर निर्वाचन आयोग की आलोचना हुई थी। इसके बाद आयोग ने शनिवार को दावों को दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय देने, निर्वाचन अधिकारियों द्वारा घर-घर जाकर मदद करने और नोटिस पाने वाले लोगों के लिए सहायता केंद्रों समेत कई कदमों की घोषणा की थी।
आयोग ने यह भी कहा था कि मतदाताओं को निर्वाचक या सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों के समक्ष सुनवाई के लिए केवल असाधारण परिस्थितियों में ही उपस्थित होना होगा। दिल्ली में रविवार को मतदाता सूची में नाम शामिल कराने में दिक्कतों का सामना कर रहे लोगों के लिए शिविर आयोजित किए गए।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त डॉ. एस एस संधू एवं विवेक जोशी की मौजूदगी में हुई बैठक के बाद निर्वाचन आयोग ने घोषणा की थी कि बूथ स्तरीय अधिकारी अब ऐसे लोगों के घर जाकर दस्तावेज एकत्र करेंगे और उन्हें एकीकृत पोर्टल ईसीआईनेट पर अपलोड करेंगे, जिनके नाम ‘मैप’ नहीं हैं या जिनके मामलों में तार्किक विसंगतियां हैं।
निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ)/सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) के कार्यालयों में व्यक्तिगत रूप से सुनवाई की जरूरत अब नहीं होगी, सिवाय असाधारण परिस्थितियों के। ऐसी सुनवाई भी प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन होगी।
आयोग ने कहा था कि परिवार के अधिकृत सदस्य भी मतदाता की ओर से सुनवाई में शामिल हो सकते हैं। इसने यह भी बताया कि ऑनलाइन सुनवाई की सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है।
आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) को जरूरत के अनुसार रैन बसेरों, मजदूरों, गरीबों, बेघर लोगों आदि के लिए पर्याप्त संख्या में सहायता केंद्र बनाने और विशेष शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया है।
निर्वाचन आयोग ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) से मिले सुझावों के आधार पर पोर्टल में कई सुधार किए जा चुके हैं। इसने कहा कि यदि क्षेत्रीय अधिकारियों को और लचीलेपन की जरूरत होगी तो उसे भी लागू किया जाएगा।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुरोध के बाद दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि बढ़ाकर 30 अक्टूबर कर दी गई है।
तदनुसार, नोटिस के निपटारे और दावों एवं आपत्तियों के निस्तारण की अवधि बढ़ाकर 30 नवंबर कर दी गई है। वहीं, महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुरोध पर वहां दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि बढ़ाकर 12 अक्टूबर कर दी गई है।
महाराष्ट्र में नोटिस के निपटारे और दावों एवं आपत्तियों के निस्तारण की अवधि बढ़ाकर 10 नवंबर कर दी गई है।
आयोग ने कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल समेत उन 20 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में जहां एसआईआर पूरा हो चुका है, एसआईआर के दौरान या उसके बाद जिन लोगों के नाम छूट गए हैं और नए या पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं समेत कोई भी व्यक्ति निरंतर अद्यतन प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए नए सिरे से आवेदन कर सकता है।
आयोग ने संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को इसकी सुविधा उपलब्ध कराने और ऐसे मतदाताओं के पंजीकरण के लिए तुरंत विशेष अभियान शुरू करने का निर्देश दिया है।
भाषा अमित नेत्रपाल
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