एशियाई खेल: अदालत ने घुड़सवारी टीम के चयन संबंधी विवाद से जुड़ी अपील खारिज की
एशियाई खेल: अदालत ने घुड़सवारी टीम के चयन संबंधी विवाद से जुड़ी अपील खारिज की
नयी दिल्ली, छह जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को जापान में होने वाले एशियाई खेलों के लिए भारत की घुड़सवार (ड्रेसेज) टीम में अनुष अग्रवाला और सुदीप्ति हजेला को शामिल न करने के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने एकल न्यायाधीश के उस पुराने फैसले को बरकरार रखा, जिसमें अग्रवाला और हजेला को कोई राहत नहीं दी गई थी।
दोनों घुड़सवार एशियाई खेल-2022 के स्वर्ण पदक विजेता हैं और उन्होंने ‘भारतीय घुड़सवारी महासंघ ’(ईएफआई) के चयन संबंधी फैसलों के खिलाफ याचिकाएं दायर की थीं।
घुड़सवारों की अपील खारिज करते हुए पीठ ने कहा कि उन्हें संभावित खिलाड़ियों की सूची तैयार किये जाने की प्रक्रिया में कोई कमी नहीं मिली, लेकिन ईएफआई चयन संबंधी कसौटी की कुछ शर्तों का ठीक से पालन करने में नाकाम रहा।
हालांकि, पीठ ने माना कि इस चरण में नया ट्रायल मुमकिन नहीं है और खेल के व्यापक हित में तथा एशियाई खेलों में देश की संभावनाओं पर किसी विपरीत असर से बचने के लिए हस्तक्षेप करने से परहेज किया।
अदालत ने कहा, ‘‘फिलहाल 15 जुलाई, 2026 की समय-सीमा को देखते हुए, उपलब्ध समय में एक और प्रतियोगिता आयोजित करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। खासकर इसलिए क्योंकि घुड़सवार और घोड़े दुनिया भर में अलग-अलग जगहों पर हैं और इतने कम समय में सभी छह संभावित खिलाड़ियों के बीच प्रतियोगिता कराने के लिए घोड़ों को अलग-अलग जगहों से एक ही जगह पर लाना मुमकिन नहीं होगा।’’
अदालत ने कहा, ‘‘हम विवादित फैसले में दखल न देने के लिए मजबूर हैं।’’ अदालत ने कहा कि खेल के व्यापक हित में और एशियाई खेलों में भारतीय टीम की संभावनाओं पर कोई विपरीत असर नहीं पड़े, इसके लिए हस्तक्षेप से परहेज करना जरूरी है।’’
एकल न्यायाधीश की अदालत ने 29 जून को एशियाई खेलों की घुड़सवारी टीम के लिए ईएफआई की चयन प्रक्रिया को सही ठहराया और घुड़सवार अग्रवाला और हजेला की तरफ से दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया।
दोनों घुड़सवारों ने ईएफआई की तदर्थ समिति द्वारा 16 जून को जारी चयन सूची को चुनौती दी थी। इस सूची में दोनों को आरक्षित घुड़सवार के तौर पर रखा गया था, जबकि चार घुड़वारों को उनसे पहले चयनित किया गया था।
भाषा संतोष नरेश
नरेश

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