असम: विपक्ष ने विधानसभा चुनाव से पहले स्ट्रॉंग रूम में खामियों का आरोप लगाया
असम: विपक्ष ने विधानसभा चुनाव से पहले स्ट्रॉंग रूम में खामियों का आरोप लगाया
गुवाहाटी, 18 अप्रैल (भाषा) असम विधानसभा में निर्वतमान नेता प्रतिपक्ष देबब्रत सैकिया ने शनिवार को आरोप लगाया कि तीन विधानसभा क्षेत्रों –देमॉ, शिवसागर और नाजिरा– की चुनाव सामग्री जिस स्ट्रॉंगरूम में रखी गयी है, उनकी सुरक्षा में चूक हुई है।
सैकिया ने चुनाव पर्यवेक्षक नरसिम्हागुरी टी. एल. रेड्डी को लिखे पत्र में कहा कि शिवसागर सरकारी बॉयज हाई स्कूल और एमपी स्कूल के कमरा नंबर 12 और 15 में वर्तमान में मौजूद सुरक्षा व्यवस्था निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित बुनियादी दिशानिर्देशों का ‘प्रत्यक्ष उल्लंघन’ है।
राज्य की 126-विधानसभा सीट के लिए मतदान नौ अप्रैल को हुआ था और मतगणना चार मई को होगी।
सैकिया ने पत्र के साथ जो ‘फोटोग्राफिक साक्ष्य’ संलग्न किए हैं, उनसे पता चलता है कि कमरों के दो दरवाजों में से एक तरफ केवल एक ताला लगा है, जो सीलबंद है, जबकि दूसरा दरवाजा केवल अंदर से बंद प्रतीत होता है।
सैकिया ने आरोप लगाया, “यह स्थिति भारतीय निर्वाचन आयोग के उन सख्त निर्देशों का सीधा एवं चिंताजनक उल्लंघन है, जिनका उद्देश्य संवेदनशील चुनावी सामग्री तक एकतरफा या अनधिकृत पहुंच को रोकना है।”
उन्होंने पत्र में कहा कि दो ताला प्रणाली लागू न करना आयोग के उस निर्देश का उल्लंघन है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि ‘स्ट्रांगरूम में केवल एक प्रवेश द्वार और दो ताले लगे होने चाहिए’ और ‘एक चाबी चुनाव अधिकारी के पास और दूसरी चाबी संबंधित विधानसभा क्षेत्र के सहायक चुनाव अधिकारी के पास होनी चाहिए’।
उन्होंने दावा किया कि आयोग ने यह अनिवार्य किया है कि ‘प्रत्येक ताले की चाबियां दो अलग-अलग नामित अधिकारियों के पास होनी चाहिए, लेकिन केवल एक ताला होने से ये साझा-चाबी सुरक्षा प्रोटोकॉल ‘पूरी तरह से निष्प्रभावी’ हो जाता है।
सैकिया ने आरोप लगाया कि संरचनात्मक ‘कमजोरियों’ के अलावा, इस विशिष्ट स्थान पर अनिवार्य परिधि सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी ‘पूरी तरह से ध्वस्त’ हो गई है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति आयोग के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करती है, जिसमें यह आवश्यक है कि ‘सबसे भीतरी परिधि की सुरक्षा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) द्वारा और बाहरी परिधि की सुरक्षा राज्य सशस्त्र पुलिस द्वारा की जानी चाहिए।
उन्होंने चुनाव पर्यवेक्षक से इन ‘प्रलेखित खामियों’ पर संज्ञान लेने और चुनावी प्रक्रिया की शुचिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया।
भाषा जितेंद्र सुरेश
सुरेश

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