Bastar Unsurveyed Villages: सरकारी रिकॉर्ड में नहीं थे बस्तर के इतने गांव, आजादी के 80 साल बाद पहली बार पहुंचेगा राजस्व अमला, नागरिकों को होगा ये फायदा

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Bastar Unsurveyed Villages: सरकारी रिकॉर्ड में नहीं थे बस्तर के इतने गांव, आजादी के 80 साल बाद पहली बार पहुंचेगा राजस्व अमला, नागरिकों को होगा ये फायदा

Bastar Unsurveyed Villages. Image Source- IBC24 Archive

Modified Date: April 18, 2026 / 07:45 pm IST
Published Date: April 18, 2026 7:45 pm IST

अशफाक अहमद/राजेश राज, नारायणपुर/रायपुरः Bastar Unsurveyed Villages: छत्तीसगढ़ के बस्तर में आजादी के करीब 80 साल बाद एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है। 497 गांव ऐसे हैं, जिनका आज तक कोई सरकारी रिकॉर्ड ही नहीं था। नक्सलवाद की वजह से यहां न जमीन का हिसाब, न आबादी का डेटा था। नक्सलवाद के खात्मे के साथ अब हालात बदल रहे हैं। इन गांवों में पहली बार राजस्व सर्वे शुरू किया जा रहा है।

Bastar Unsurveyed Villages: दरअसल, बस्तर में सालों तक नक्सलियों का दबदबा रहा। इसी डर की वजह से प्रशासन इन इलाकों तक पहुंच ही नहीं पाया। नतीजा ये रहा कि सैकड़ों गांव सरकारी रिकॉर्ड से बाहर ही रह गए। सरकार को सिर्फ इनके नाम पता थे, लेकिन गांव कितने बड़े हैं, कितने लोग रहते हैं, किसके पास कितनी जमीन है? इसका कोई रिकॉर्ड नहीं था। बस्तर के अनसर्वे गांवों की बात करें तो नारायणपुर के 240, बीजापुर के 91, सुकमा के 97, कोंडागांव के 52, बस्तर के 25, कांकेर के 10, दंतेवाड़ा के 10 गांव शामिल हैं।

आईआईटी रुड़की करेगा मदद (Abujhmad survey news)

नारायणपुर के अबूझमाड़ में पहुंचना आज भी आसान नहीं है। कई गांव ऐसे हैं जहां नदी, जंगल और पहाड़ पार करके जाना पड़ता है और यही वजह थी कि यहां आज तक सर्वे का काम नहीं हो पाया, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। इन गांवों में पहली बार आईआईटी रुड़की की मदद से राजस्व सर्वे शुरू किया जा रहा है। जमीन, जंगल, नदी और खेत सबका रिकॉर्ड तैयार होगा। इस सर्वे के बाद गांव के लोगों को अपनी जमीन पर कानूनी हक, फसल बेचने का अधिकार, सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा। इस मामले को लेकर कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि यह किसी बड़े के सपने के साकार होने जैसा है। बस्तर के विकास को लेकर हमारी सरकार लगातार काम कर रही है।

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सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।