महिला वकील पर हमले का मामला : न्यायालय ने पुलिस से जल्द जांच पूरी करने को कहा
महिला वकील पर हमले का मामला : न्यायालय ने पुलिस से जल्द जांच पूरी करने को कहा
नयी दिल्ली, 16 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली पुलिस से कहा है कि वह एक महिला वकील पर कथित तौर पर उसके पति द्वारा किए गए क्रूर हमले की जांच जल्द से जल्द पूरी करे और साथ ही पीड़िता तथा उसके बच्चों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करे।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि पुलिस यह सुनिश्चित करे कि जांच निष्पक्ष, तटस्थ और बिना किसी पूर्वाग्रह के की जाए।
उच्चतम न्यायालय ने पिछले महीने स्वतः संज्ञान लिया था, जब अधिवक्ता स्नेहा कलिता ने मामले में तत्काल हस्तक्षेप और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) की पीड़ित मुआवजा योजना के तहत मुआवजा देने का आग्रह करते हुए प्रधान न्यायाधीश को एक पत्र लिखा था।
आरोपों के अनुसार, कड़कड़डूमा जिला अदालत में वकालत करने वाली महिला अधिवक्ता पर 22 अप्रैल को सोनिया विहार में उसके पति ने तलवार से हमला किया था।
पीठ ने 11 मई को मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा था कि पुलिस द्वारा दाखिल स्थिति रिपोर्ट के अनुसार प्राथमिकी में जांच अभी जारी है।
पीठ ने कहा, ‘‘हम जांच अधिकारी को निर्देश देते हैं कि वह जांच जल्द पूरी करके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने का प्रयास करे।’’
उसने कहा, ‘‘दिल्ली पुलिस यह सुनिश्चित करे कि पीड़िता और उसके बच्चों को कोई नुकसान न पहुंचे तथा उन्हें पर्याप्त सुरक्षा दी जाए।’’
न्यायालय ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि पीड़िता की बेटियों को प्ले-स्कूल और नियमित स्कूल सहित सभी सुविधाएं नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएं।
उसने कहा कि स्कूल फीस, यूनिफॉर्म, किताबें, सार्वजनिक परिवहन आदि सहित सभी खर्च दिल्ली सरकार का शिक्षा विभाग वहन करेगा।
पीठ ने कहा, ‘‘बालिकाओं को दिल्ली सरकार की नीति के अनुसार छात्रवृत्ति, मानदेय या वित्तीय सहायता भी दी जाए।’’
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि 27 अप्रैल के आदेश के अनुसार दोनों बेटियां पहले अपने दादा-दादी के पास थीं और बाद में बाल कल्याण समिति ने उन्हें अपनी अभिरक्षा में ले लिया था।
पीठ ने कहा, “मामले के तथ्यों में जाए बिना, चूंकि पीड़ित मां अब अस्पताल से छुट्टी पा चुकी है और काफी हद तक स्वस्थ हो गई है, इसलिए चार वर्ष और एक वर्ष की दोनों बेटियों की अभिरक्षा मां को सौंपी जाए।’’
न्यायालय ने कहा कि चार अस्पतालों के खिलाफ जांच को गहराई से परखा जाए और सक्षम अदालत के समक्ष अलग रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
पीठ ने कहा, ‘‘इसके बाद पीड़िता कानून के अनुसार उपलब्ध उचित कानूनी उपाय अपना सकती है।’’
उच्चतम न्यायालय ने पहले टिप्पणी की थी कि पीड़िता को चार अस्पतालों में ले जाया गया, जिनमें से तीन ने भर्ती करने से इनकार कर दिया था। न्यायालय ने यह भी कहा था कि एक अस्पताल ने केवल प्राथमिक उपचार देकर उसे दूसरे अस्पताल भेज दिया।
पीठ ने 11 मई को मामले का निपटारा करते हुए स्पष्ट किया कि मामले में उसकी कार्यवाही को मामले के गुण-दोष पर अदालत की राय नहीं माना जाए।
न्यायालय ने 27 अप्रैल को महिला अधिवक्ता पर हुए क्रूर हमले का संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त को जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी, संभव हो तो सहायक पुलिस आयुक्त या उपायुक्त रैंक की महिला अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया था।
दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और मुख्य आरोपी माने जा रहे पति को 25-26 अप्रैल की रात गिरफ्तार कर लिया गया।
पीठ ने कहा कि पीड़िता को इलाज और अपनी नाबालिग बेटियों की देखभाल के लिए आर्थिक सहायता की जरूरत होगी। इसलिए अदालत ने एनएएलएसए को अंतरिम रूप से तीन लाख रुपये जारी करने का निर्देश दिया।
पुलिस के अनुसार, सोनिया विहार निवासी आरोपी मनोज कुमार को खजूरी खास इलाके से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि आरोपी ने 22 अप्रैल को अपनी 38 वर्षीय पत्नी पर हमला किया था।
पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में घरेलू विवाद को हमले का कारण माना जा रहा है, हालांकि सभी पहलुओं से जांच जारी है।
भाषा गोला अमित
अमित

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