आठवले ने जनगणना में जाति गणना को शामिल करने का समर्थन किया
आठवले ने जनगणना में जाति गणना को शामिल करने का समर्थन किया
(फाइल फोटो के साथ)
पणजी, 20 मई (भाषा) केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने जनगणना में जातिगत गणना को शामिल करने के केंद्र के फैसले का बुधवार को समर्थन करते हुए कहा कि इससे विभिन्न समुदायों की सटीक आबादी संख्या निर्धारित करने में मदद मिलेगी और सरकारों को आरक्षण नीतियों को अधिक प्रभावी ढंग से तैयार करने में मदद मिलेगी।
वर्ष 2027 की जनगणना आधिकारिक तौर पर 16वीं राष्ट्रीय जनगणना कहलायेगी। यह 1931 के बाद पहली बार जाति गणना वाली व्यापक जनगणना होगी। यह देश की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना होगी।
आठवले ने पणजी में प्रेसवार्ता में कहा कि राज्यों में आरक्षण अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की आबादी से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि गोवा में अनुसूचित जाति की आबादी लगभग दो प्रतिशत है और पांच मान्यता प्राप्त अनुसूचित जातियां हैं।
सामाजिक न्याय राज्य मंत्री आठवले ने आगामी राष्ट्रीय जनगणना के तहत जाति गणना कराने के केंद्र के कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे विभिन्न जातियों और समुदायों की जनसंख्या के बारे में सटीक आंकड़े प्राप्त होंगे।
रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के प्रमुख आठवले ने कहा कि जनगणना का आवास सर्वेक्षण चरण शुरू हो चुका है और इसके बाद जनसंख्या गणना की जाएगी, जिसके दौरान जातिगत विवरण भी एकत्र किए जाएंगे।
उन्होंने कहा, “जनगणना पूरी होने के बाद, सरकार को विभिन्न जातियों की आबादी के प्रतिशत के बारे में सटीक आंकड़े मिल जाएंगे, जिससे नीति-निर्माण में मदद मिलेगी।”
बुधवार को उच्चतम न्यायालय ने जाति-आधारित जनगणना कराने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज कर दी और कहा कि यह मुद्दा नीतिगत क्षेत्र में आता है।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि सरकार को कल्याणकारी कदम उठाने के लिए पिछड़ी जातियों से संबंधित लोगों की संख्या जानना आवश्यक है।
आठवले ने कहा कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और उत्तरी राज्यों जैसे राज्यों से गोवा आकर बसे लोगों की ओर से आरक्षण की मांग लंबे समय से चली आ रही है, क्योंकि इन राज्यों में अनुसूचित जाति की आबादी अपेक्षाकृत अधिक है।
उन्होंने कहा कि गोवा में अनुसूचित जाति समुदाय को लगभग दो प्रतिशत आरक्षण मिलता है, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त होता है।
नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की प्रशंसा करते हुए, आठवले ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की शुरुआत को एक ‘क्रांतिकारी निर्णय’ बताया।
उन्होंने कहा, ‘‘उच्च जाति या अन्य समुदायों के सभी परिवार आर्थिक रूप से मजबूत नहीं होते हैं। मोदी सरकार ने फैसला किया है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के दायरे में न आने वाले और सालाना आठ लाख रुपये से कम आय वाले परिवारों को भी आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।’’
भाषा
राजकुमार अविनाश
अविनाश
अविनाश

Facebook


