दिल्ली-एनसीआर अस्पताल में ऑस्ट्रेलियाई मरीज की मलाशय कैंसर की रोबोटिक सर्जरी
दिल्ली-एनसीआर अस्पताल में ऑस्ट्रेलियाई मरीज की मलाशय कैंसर की रोबोटिक सर्जरी
नयी दिल्ली, 24 जून (भाषा) बार-बार उभरने वाले मलाशय कैंसर से पीड़ित 45-वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई व्यक्ति की दिल्ली-एनसीआर के एक अस्पताल में उन्नत रोबोटिक सर्जरी की गई, जिसके जरिये चिकित्सकों ने उसके पेट पर कोई शल्य-चीरा लगाए बिना ट्यूमर निकाल दिया।
यह प्रक्रिया मानेसर स्थित अस्पताल में रोबोटिक ट्रांसएनल मिनिमली इनवेसिव सर्जरी (टीएएमआईएस) तकनीक के जरिये की गई। यह प्रारंभिक चरण के चुनिंदा मलाशय कैंसर मामलों में इस्तेमाल की जाने वाली अंग-संरक्षण तकनीक है।
अस्पताल द्वारा जारी बयान के अनुसार, मरीज पिछले 18 महीनों से मलाशय कैंसर से जूझ रहा था और ऑस्ट्रेलिया में कीमोथेरेपी एवं विकिरण चिकित्सा करा चुका था।
हालांकि शुरुआती उपचार के बाद ट्यूमर में सुधार देखा गया, लेकिन बाद में उसके दोबारा उभरने के संकेत मिले।
बयान में कहा गया कि ऑस्ट्रेलिया में चिकित्सकों ने उसे ऐसी सर्जरी कराने की सलाह दी थी, जिसमें संभवतः पेट पर चीरे लगाने पड़ते और उपचार के दौरान अस्थायी ‘स्टोमा’ बैग का उपयोग करना पड़ता।
अस्थायी ‘स्टोमा’ शल्यक्रिया के जरिये पेट पर बनाया गया एक कृत्रिम छिद्र होता है, जिसके माध्यम से मल को कुछ समय के लिए शरीर के बाहर लगे थैले में एकत्र किया जाता है।
इसके बाद मरीज भारत आया और मानेसर स्थित फोर्टिस अस्पताल के कोलोरेक्टल कैंसर विशेषज्ञों से परामर्श किया। जांच के बाद चिकित्सकों ने पाया कि उसका मामला रोबोटिक टीएएमआईएस प्रक्रिया के लिए उपयुक्त है।
वरिष्ठ निदेशक (सर्जिकल ऑन्कोलॉजी) डॉ. विनय सैमुअल गायकवाड ने कहा, ‘‘हमने उनके मामले को रोबोटिक टीएएमआईएस के लिए उपयुक्त पाया। इस तकनीक की मदद से हम अत्यधिक सटीकता के साथ ट्यूमर को निकालने में सफल रहे। इससे पेट पर चीरा लगाने और बाहरी बैग की आवश्यकता से बचा जा सका।’’
उन्होंने बताया कि मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और उसे सर्जरी के दो दिन बाद ही अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
सैमी नामक मरीज ने कहा कि वह बड़ी सर्जरी और अस्थायी बाहरी बैग के इस्तेमाल को लेकर चिंतित था।
भाषा अमित सुरेश
सुरेश

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