अरुणाचल के तवांग के संवेदनशील इलाकों में जीएलओएफ के जोखिम को लेकर जागरूकता कार्यक्रम

अरुणाचल के तवांग के संवेदनशील इलाकों में जीएलओएफ के जोखिम को लेकर जागरूकता कार्यक्रम

अरुणाचल के तवांग के संवेदनशील इलाकों में जीएलओएफ के जोखिम को लेकर जागरूकता कार्यक्रम
Modified Date: September 23, 2026 / 09:30 pm IST
Published Date: September 23, 2026 9:30 pm IST

ईटानगर, 23 सितंबर (भाषा) अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में हिमनद झील फटने से आने वाली बाढ़ (जीएलओएफ) के जोखिम को लेकर पांच दिवसीय जागरूकता और संवेदनशीलता कार्यक्रम बुधवार को संपन्न हुआ।

इस दौरान अधिकारियों ने मगो और सेला क्षेत्रों के संवेदनशील निचले इलाकों में समय पर चेतावनी, निकासी योजना और सामुदायिक तैयारियों पर जोर दिया।

उच्च जोखिम वाली हिमनद झीलों के आसपास रहने वाले समुदायों की तैयारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित यह कार्यक्रम बुधवार को लुंगला के डोंगसेंग मंग स्थित सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की चौकी में संपन्न हुआ।

एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया कि समापन कार्यक्रम में एसएसबी कर्मियों और स्थानीय समुदाय के सदस्यों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए तवांग जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी (डीडीएमओ) गेंडेन त्सोमु ने संवेदनशील निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच अधिक जागरूकता और तैयारियों की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने प्रतिभागियों से सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए उचित निकासी योजना तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध शुरुआती चेतावनी तंत्र तैयार रखने का आग्रह किया।

एसएसबी शिविर के निचले क्षेत्र में स्थित होने को देखते हुए त्सोमु ने संभावित अचानक बाढ़ या अन्य खतरे की स्थिति में चेतावनी को तुरंत प्रसारित करने के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने प्रतिभागियों से अचानक बाढ़ या किसी अन्य खतरे के संकेत मिलने पर आसपास के लोगों को तुरंत सूचित करने का भी आह्वान किया।

वरिष्ठ सलाहकार डॉ. भूपेन मिली ने जीएलओएफ के कारणों और संभावित प्रभावों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हिमनद झील के फटने की स्थिति में बाढ़ का पानी डोंगसेंग मंग एसएसबी शिविर तक पहुंचने में कितना समय लग सकता है।

उन्होंने प्रतिभागियों को सुरक्षित निकासी मार्गों, सुरक्षित स्थानों की पहचान और जीवन तथा संपत्ति की सुरक्षा के लिए समय पर निकासी और सामुदायिक स्तर पर समन्वित कार्रवाई की जरूरत के बारे में भी जागरूक किया।

पांच दिवसीय अभियान के तहत चाकसम, फोंगदा, ग्रांगखर और खेत ब्रिज में भी ऐसे ही जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें संवेदनशील निचले इलाकों में रहने वाले समुदायों को शामिल किया गया।

राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के कर्मियों ने भी पूरे कार्यक्रम के दौरान व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए, जिसमें जीवन बचाने के कौशल, खोज एवं बचाव तकनीक और आपात प्रतिक्रिया प्रक्रियाएं शामिल थीं।

इस प्रशिक्षण का उद्देश्य आपात स्थितियों के दौरान स्थानीय समुदायों और अन्य संबंधित पक्षों की तैयारियों और प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार करना था।

प्रतिभागियों को आधिकारिक चेतावनी के प्रति सतर्क रहने और जिला प्रशासन एवं आपदा प्रबंधन अधिकारियों द्वारा जारी सलाह एवं निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा गया।

भाषा अमित अविनाश

अविनाश


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