‘बार आपके इंतजार में है’: वकील की याचिका खारिज करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने सुनाया किस्सा
‘बार आपके इंतजार में है’: वकील की याचिका खारिज करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने सुनाया किस्सा
नयी दिल्ली, आठ मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय में उस समय एक दुर्लभ क्षण देखने को मिला जब भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान अपनी वकालत के शुरुआती दिनों का एक किस्सा साझा करते हुए बताया कि न्यायिक अधिकारी बनने की आकांक्षा रखने के लिए कैसे उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश ने पहले उनसे नाराजगी जताई और बाद में कहा कि ‘‘बार आपका इंतजार कर रही है’’।
प्रधान न्यायाधीश ने यह किस्सा न्यायिक सेवा की एक अभ्यर्थी का हौसला बढ़ाने के लिए सुनाया जिसने एक परीक्षा पत्र के पुनर्मूल्यांकन का अनुरोध किया था।
प्रधान न्यायाधीश और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने प्रेरणा गुप्ता की याचिका खारिज कर दी लेकिन वह अदालत कक्ष से मुस्कुराते हुए बाहर निकलीं।
जब गुप्ता ने अपनी दलीलें पेश कीं तो प्रधान न्यायाधीश ने हस्तक्षेप करते हुए कहा, ‘‘मैं अपनी एक निजी कहानी साझा करना चाहता हूं और मुझे उम्मीद है कि इसे सुनकर आप खुशी-खुशी यहां से जाएंगी क्योंकि हम आपकी याचिका स्वीकार नहीं कर सकते।’’
प्रधान न्यायाधीश ने विधि के छात्र के रूप में अपने अंतिम वर्ष का किस्सा सुनाया जब वह भी न्यायिक अधिकारी बनना चाहते थे। उन्होंने लिखित परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी और उन्हें साक्षात्कार के लिए उपस्थित होना था।
उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं अंतिम वर्ष में था, तब मैंने न्यायिक सेवा के लिए आवेदन किया था। उस समय अंतिम वर्ष के छात्र आवेदन कर सकते थे। जब तक परिणाम आए, प्रक्रिया बदल चुकी थी। पहले लोक सेवा आयोग चयन प्रक्रिया आयोजित करता था। फिर उच्चतम न्यायालय का एक फैसला आया, जिसके अनुसार उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को विषय विशेषज्ञ के रूप में काम करना था और उनकी राय आयोग पर बाध्यकारी होती।’’
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि उसी दौरान वह पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय चले गए थे और उन्होंने वहां वकालत शुरू कर दी थी। उन्होंने बताया कि उनके साक्षात्कार बोर्ड में सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश वही थे, जिनके समक्ष उन्होंने कुछ ही दिन पहले दो महत्वपूर्ण मामलों में दलील पेश की थीं।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘साक्षात्कार बोर्ड के लिए नामित सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश मुझे पहले से जानते थे, क्योंकि मैंने उनके समक्ष दो मामलों में बहस की थी। इनमें से एक मामला सुनीता रानी बनाम बलदेव राज था, जिसमें उन्होंने वैवाहिक विवाद में मेरी अपील स्वीकार की थी और सिजोफ्रेनिया के आधार पर तलाक के जिला न्यायाधीश के फैसले को रद्द कर दिया था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘एक दिन उन्होंने मुझे अपने कक्ष में बुलाया और पूछा, ‘क्या आप न्यायिक अधिकारी बनना चाहते हैं?’ मैंने कहा, हां। उन्होंने तुरंत कहा, ‘मेरे कक्ष से बाहर निकल जाओ’।’’
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मैं कांपता हुआ बाहर आया। मेरे सारे सपने टूट गए थे। मुझे लगा कि उन्होंने मुझे झिड़क दिया है और मेरा करियर खत्म हो गया है।’’
हालांकि, अगले दिन इस कहानी ने एक और मोड़ लिया, जब न्यायाधीश ने उन्हें फिर बुलाया और इस बार उन्होंने ऐसी सलाह दी, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘उन्होंने कहा, ‘अगर आप न्यायाधीश बनना चाहते हैं, तो आपका स्वागत है लेकिन मेरी सलाह है कि न्यायिक अधिकारी मत बनिए। विधिज्ञ परिषद (बार) आपका इंतजार कर रही है’।’’
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि इसके बाद उन्होंने साक्षात्कार में शामिल नहीं होने का फैसला किया और शुरुआत में अपने माता-पिता को भी यह बात नहीं बताई, क्योंकि उन्हें डर था कि वे निराश होंगे। उन्होंने खुद को वकालत के लिए समर्पित कर दिया।
प्रधान न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता वकील से पूछा, ‘‘अब बताइए, मैंने सही फैसला किया था या गलत?’’
उन्होंने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वह एक प्रश्नपत्र के पुनर्मूल्यांकन में उलझने के बजाय भविष्य की ओर देखें।
उन्होंने कहा, ‘‘अगली बार उच्चतर न्यायिक सेवा के लिए आवेदन कीजिए। विधिज्ञ परिषद के पास देने को बहुत कुछ है।’’
गुप्ता अदालत में कानूनी राहत की उम्मीद लेकर आई थीं लेकिन याचिका खारिज होने के बावजूद मुस्कुराते हुए बाहर निकलीं।
भाषा
सिम्मी मनीषा वैभव
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