बेअंत सिंह हत्याकांड: न्यायालय ने हवारा की जेल स्थानांतरण याचिका पर सुनवाई 11 मार्च तक स्थगित की

बेअंत सिंह हत्याकांड: न्यायालय ने हवारा की जेल स्थानांतरण याचिका पर सुनवाई 11 मार्च तक स्थगित की

बेअंत सिंह हत्याकांड: न्यायालय ने हवारा की जेल स्थानांतरण याचिका पर सुनवाई 11 मार्च तक स्थगित की
Modified Date: February 17, 2026 / 12:43 pm IST
Published Date: February 17, 2026 12:43 pm IST

नयी दिल्ली, 17 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को बेअंत सिंह हत्याकांड के दोषी जगतार सिंह हवारा की उस याचिका पर सुनवाई 11 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी, जिसमें उसने खुद को दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी जेल में स्थानांतरित किए जाने का अनुरोध किया था।

बब्बर खालसा का आतंकवादी 1995 में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री की हत्या से संबंधित मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।

न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा स्थगन का अनुरोध किए जाने के बाद मामले की सुनवाई को स्थगित कर दिया।

पिछले साल 27 सितंबर को, उच्चतम न्यायालय ने हवारा की याचिका पर केंद्र, चंडीगढ़ प्रशासन और दिल्ली तथा पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया था।

हवारा 31 अगस्त, 1995 को चंडीगढ़ में सिविल सचिवालय के प्रवेश द्वार पर हुए विस्फोट से संबंधित मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है, जिसमें बेअंत सिंह और 16 अन्य लोग मारे गए थे।

शीर्ष अदालत में दायर याचिका में कहा गया है कि 22 जनवरी, 2004 को कथित तौर पर जेल से भागने और बाद में गिरफ्तार होने की घटना को छोड़कर, हवारा का जेल में आचरण बेदाग रहा है।

इसमें अनुरोध किया गया है कि उसे दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी अन्य जेल में स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी में उसके खिलाफ कोई मामला लंबित नहीं है।

याचिका में कहा गया है, ‘‘याचिकाकर्ता (हवारा) वर्तमान में पंजाब राज्य में दर्ज एक मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है… वह पंजाब राज्य के फतेहगढ़ साहिब जिले का निवासी है और उसे पंजाब की ही किसी जेल में रखा जाना चाहिए।’’

इसमें कहा गया है कि हत्या के बाद याचिकाकर्ता पर 36 झूठे मामले दर्ज किए गए थे और उसे एक को छोड़कर बाकी सभी मामलों में बरी कर दिया गया है।

याचिका में कहा गया है कि इसी मामले में दोषी ठहराए गए और जेल तोड़ने की घटना में शामिल एक व्यक्ति को तिहाड़ जेल से चंडीगढ़ की एक जेल में स्थानांतरित कर दिया गया है।

इसमें कहा गया है, ‘‘केवल इस तथ्य के आधार पर कि याचिकाकर्ता को वर्षों पहले उच्च जोखिम वाला कैदी माना जाता था, आज उसे दिल्ली में रखने और पंजाब में स्थानांतरित न करने का यह पर्याप्त कारण नहीं है।’’

याचिका में कहा गया कि उसकी बेटी पंजाब में है और हवारा की पत्नी का निधन हो चुका है तथा उसकी मां अमेरिका में ‘कोमा’ में है।

मार्च 2007 में, इस मामले में एक निचली अदालत ने हवारा को मौत की सजा सुनाई थी।

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने अक्टूबर 2010 में उसकी सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था और यह निर्देश दिया था कि उसे जीवन भर जेल से रिहा नहीं किया जाएगा।

हवारा की याचिका में कहा गया है कि उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ उसके और अभियोजन पक्ष द्वारा दायर अपील उच्चतम न्यायालय में लंबित हैं।

भाषा नेत्रपाल मनीषा

मनीषा


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