बंगाल के मुख्यमंत्री ने तीसरा साप्ताहिक ‘जनता दरबार’ लगाया

बंगाल के मुख्यमंत्री ने तीसरा साप्ताहिक 'जनता दरबार' लगाया

बंगाल के मुख्यमंत्री ने तीसरा साप्ताहिक ‘जनता दरबार’ लगाया
Modified Date: June 2, 2026 / 03:32 pm IST
Published Date: June 2, 2026 3:32 pm IST

कोलकाता, दो जून (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को अपना तीसरा साप्ताहिक ‘जनता दरबार’ लगाया, जिसमें बड़ी संख्या में मरीजों, कलाकारों, पेशेवरों और आम नागरिकों ने पहुंचकर अपनी शिकायतें दर्ज कराईं और नए मुख्यमंत्री को अपनी कठिनाइयों से अवगत कराया।

यहां साल्ट लेक स्थित भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में सैकड़ों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे इमारत के आसपास की संकरी गलियां प्रतीक्षालय में तब्दील हो गईं।

इनमें से कई लोगों ने मुख्यमंत्री से सीधे मुलाकात की आस में राज्य के विभिन्न जिलों और दूर-दराज के इलाकों से यात्रा की थी।

इस भीड़ में बंगाल के सामाजिक परिदृश्य की विविधता साफ दिखाई दे रही थी – जिसमें मरीज, नौकरी के इच्छुक युवा, चुनावी हिंसा के कथित पीड़ित और नागरिक व व्यक्तिगत मामलों में हस्तक्षेप की मांग करने वाले लोग शामिल थे।

अधिकारियों ने बताया कि ‘जनता दरबार’ के दौरान बेरोजगारी, स्वास्थ्य सेवा, कानून-व्यवस्था, भूमि विवाद और सामाजिक कल्याण लाभों सहित विभिन्न मुद्दों से जुड़ी याचिकाएं सौंपी गईं।

मुख्यमंत्री से मिलने वालों में एक कैंसर मरीज भी शामिल था, जिसने इलाज के दौरान अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए आजीविका सुरक्षित करने में सहायता मांगी।

गायकों और कलाकारों का एक समूह भी इस जनसुनवाई में शामिल हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार के शासनकाल के दौरान उन्हें सरकार द्वारा प्रायोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रस्तुति देने के अवसर नहीं मिले।

उन्होंने दावा किया कि केवल चुनिंदा कलाकारों को ही, जो कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व के करीबी थे, कार्यक्रम और वित्तीय लाभ मिले, जबकि अन्य को दरकिनार कर दिया गया।

एक गायक ने आरोप लगाया, ‘हमें हमारे अधिकारों और अवसरों से वंचित किया गया। कार्यक्रम केवल उन्हीं कुछ लोगों को आवंटित किए गए, जो सत्तारूढ़ दल की भाषा बोलते थे।’

राज्य भाजपा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘पश्चिम बंगाल में प्रशासन की एक नयी संस्कृति उभर रही है। आज आम लोगों को अपनी बात सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है।’

पार्टी ने कहा कि जनता के आशीर्वाद से जिम्मेदारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री का मानना है कि लोगों की बात सुनना और उनके साथ खड़ा होना उनका सबसे बड़ा कर्तव्य है; ‘जनता दरबार’ इसी विश्वास का प्रत्यक्ष रूप है।

भाषा

सुमित दिलीप

दिलीप


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