बंगाल सरकार ने सबुज साथी को सारथी योजना नाम दिया, 12.59 लाख छात्रों को साइकिल मिलेगी: शुभेंदु

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बंगाल सरकार ने सबुज साथी को सारथी योजना नाम दिया, 12.59 लाख छात्रों को साइकिल मिलेगी: शुभेंदु

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  • Publish Date - September 29, 2026 / 04:21 PM IST,
    Updated On - September 29, 2026 / 04:21 PM IST

कोलकाता, 29 सितंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि उनकी सरकार इस शैक्षणिक वर्ष में ‘सारथी’ योजना के तहत 12.59 लाख विद्यार्थियों को साइकिल वितरित करेगी।

हावड़ा के एक स्कूल में साइकिल वितरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार घटिया साइकिल खरीदती थी और उन्हें अपनी ‘सबुज साथी’ योजना के तहत विद्यार्थियों को वितरित करती थी।

भाजपा सरकार ने पूर्ववर्ती सरकार की ‘सबुज साथी’ योजना का नाम बदलकर ‘सारथी’ कर दिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हम हावड़ा में उच्च गुणवत्ता वाली साइकिल बनाने वाली फैक्टरी लगाने के लिए जमीन आवंटित करेंगे। सारथी योजना के तहत इस शैक्षणिक वर्ष में 12.59 लाख छात्रों को साइकिल मिलेगी।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि सारथी योजना के तहत स्कूलों के लिए संयुक्त अनुदान के तौर पर 300 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

उन्होंने पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार पर ‘‘तुष्टीकरण की राजनीति’’ के तहत एक खास समुदाय के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने का आरोप लगाया।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हम इसे ठीक करेंगे। अब सनातनी हिंदू के साथ-साथ अन्य धर्मों के विद्यार्थियों को भी छात्रवृत्ति मिलेगी।’’

उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार उच्च माध्यमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों को स्मार्टफोन और मोबाइल टैबलेट के लिए 10,000 रुपये नहीं देगी, जैसा कि पिछली सरकार ने किया था। उन्होंने कहा, ‘‘हम उन्हें पढ़ाई-लिखाई की सामग्री खरीदने के लिए अधिक पैसे देंगे।’’

मुख्यमंत्री ने स्कूलों में एनसीसी (राष्ट्रीय कैडेट कोर) कार्यक्रम बंद करने के लिए वाम मोर्चा और तृणमूल सरकारों पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से बात की है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें राष्ट्रवाद की भावना से ओत-प्रोत होना चाहिए और श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों से प्रेरणा लेनी चाहिए, जिनकी आज के पश्चिम बंगाल को बनाने में अहम भूमिका थी। आज के युवाओं को सनातनी हिंदुओं की मातृभूमि को बचाने में उनके योगदान और बलिदान को याद रखना चाहिए।’’

भाषा सुभाष पवनेश

पवनेश