बंगाल: अदालत ने कहा-न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा जारी रहेगी, एनआईए गिरफ्तार लोगों की पृष्ठभूमि बताए
बंगाल: अदालत ने कहा-न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा जारी रहेगी, एनआईए गिरफ्तार लोगों की पृष्ठभूमि बताए
नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में लगे न्यायिक अधिकारियों को प्रदान की गई सुरक्षा राज्य में विधानसभा चुनाव संपन्न होने तक बरकरार रहेगी और उसकी पूर्व अनुमति के बिना इसे वापस नहीं लिया जा सकता।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह भी जानना चाहा कि क्या मालदा जिले में एक अप्रैल को सात न्यायिक अधिकारियों के घेराव की घटना के संबंध में एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों की ‘‘कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि’’ है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि ‘‘इस मामले को तार्किक निष्कर्ष तक ले जाना होगा’’।
प्रधान न्यायाधीश ने मतदाता सूची से हटाए गए लोगों की अपील पर निर्णय लेने के लिये 19 अपीलीय न्यायाधिकरणों के वास्ते समयसीमा तय करने के संबंध में कोई आदेश पारित करने से इनकार कर दिया।
मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों की 60 लाख से अधिक आपत्तियों के निस्तारण के लिए पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के लगभग 700 न्यायिक अधिकारियों को जारी एसआईआर प्रक्रिया में तैनात किया गया है।
शीर्ष अदालत ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के एक पत्र का स्वतः संज्ञान लिया था, जिसमें एक अप्रैल की रात की भयावह घटना का विस्तृत वर्णन किया गया था, जिसमें तीन महिलाओं सहित न्यायिक अधिकारियों और पांच वर्षीय एक बच्चे को भीड़ ने नौ घंटे से अधिक समय तक बंधक बनाकर रखा गया था और इस दौरान न उन्हें खाना मिला न ही पीने के लिए पानी।
सोमवार को पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘हम निर्वाचन आयोग और पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश देते हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि न्यायिक अधिकारियों को प्रदान की गई सुरक्षा को इस न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना वापस न लिया जाए।’’
हालांकि, पीठ ने कहा कि यह आदेश झारखंड और ओडिशा के उन न्यायिक अधिकारियों पर लागू नहीं होगा जो अपने-अपने राज्यों में न्यायिक कार्य फिर से शुरू करने के लिए पश्चिम बंगाल छोड़ चुके हैं।
कार्यवाही के दौरान, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की ओर से एक अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसने एक अप्रैल को मालदा जिले में हुई घटना की जांच अपने हाथ में ली है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम यह जानना चाहते हैं कि गिरफ्तार किए गए लोगों में से क्या किसी का कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि है। हमें इसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना होगा।’’
भाषा
नेत्रपाल प्रशांत
प्रशांत

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