बंगाल: विश्व भारती के शिक्षकों ने कुलपति को पत्र लिखकर चुनाव ड्यूटी को लेकर चिंता जताई

बंगाल: विश्व भारती के शिक्षकों ने कुलपति को पत्र लिखकर चुनाव ड्यूटी को लेकर चिंता जताई

बंगाल: विश्व भारती के शिक्षकों ने कुलपति को पत्र लिखकर चुनाव ड्यूटी को लेकर चिंता जताई
Modified Date: April 27, 2026 / 03:32 pm IST
Published Date: April 27, 2026 3:32 pm IST

कोलकाता, 27 अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल विश्व भारती विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने चुनाव से संबंधित “अत्यंत तनावपूर्ण” ड्यूटी को लेकर कुलपति प्रबीर कुमार घोष को पत्र लिखा और निर्वाचन आयोग से तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध किया।

केंद्रीय विश्वविद्यालय के कई संकाय सदस्यों ने 26 अप्रैल को लिखे पत्र में कहा कि वे विभिन्न जिलों में चुनाव संबंधी कार्यों के लिए निरंतर तैनाती के कारण “अत्यंत मानसिक व शारीरिक तनाव” का सामना कर रहे हैं।

पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए हो रहे चुनाव के तहत 23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान हुआ जबकि 29 अप्रैल को दूसरे चरण का मतदान होगा। मतगणना चार मई को होगी।

शिक्षकों ने पत्र में कहा, “हम मजबूर होकर तत्काल आपका ध्यान दिलाना चाहते हैं।”

उन्होंने कहा कि उनमें से कई को दक्षिण 24 परगना जिले के विभिन्न भागों में ड्यूटी दी गई है और वीरभूम में काम पूरा करने के महज एक दिन बाद 28 अप्रैल की सुबह वहां पहुंचने के लिए कहा गया है।

पत्र में कहा गया है, “कई लोगों को सागर द्वीप तक जाना है। सीमित परिवहन विकल्प और बहुत कम समय देने के कारण समय पर वहां पहुंचना बहुत मुश्किल है।”

विश्व भारती फैकल्टी एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारी सुदीप्त भट्टाचार्य ने कहा कि शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन ड्यूटी का कार्यक्रम, तैनाती के स्थान और पहुंचने का समय “किसी भी व्यक्ति के लिए मानवीय रूप से असंभव है और इस पर बहुत कम विचार किया गया है।”

उन्होंने कहा, “दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है, ऐसे में हम इस मामले में कुलपति और निर्वाचन आयोग के तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हैं।”

कुलपति की तरफ से इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की गई।

निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि आयोग को पत्र प्राप्त हुआ है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में “आयोग के लिए चुनाव कार्यक्रम में बदलाव करना लगभग असंभव होगा।”

उन्होंने कहा, “हम सम्मानित शिक्षकों समेत सभी से सहयोग की अपेक्षा करते हैं। आयोग उनके ठहरने और परिवहन की व्यवस्था करेगा और पहले चरण की तरह उनकी सुरक्षा का भी ध्यान रखेगा।”

भाषा मनीषा जोहेब नरेश

नरेश


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