भरत तिवारी मुठभेड़ प्रकरण: उसके गांव पहुंचे प्रशांत किशोर

भरत तिवारी मुठभेड़ प्रकरण: उसके गांव पहुंचे प्रशांत किशोर

भरत तिवारी मुठभेड़ प्रकरण: उसके गांव पहुंचे प्रशांत किशोर
Modified Date: June 24, 2026 / 05:04 pm IST
Published Date: June 24, 2026 5:04 pm IST

(तस्वीर के साथ)

आरा, 24 जून (भाषा) जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर बुधवार को भोजपुर जिले में हालिया कथित पुलिस मुठभेड़ में जान गंवाने वाले भरत भूषण तिवारी के पैतृक गांव पहुंचे और उसके परिजनों से मुलाकात की।

जन सुराज पार्टी के पदाधिकारियों ने बताया कि भरत भूषण के परिजनों ने न्याय दिलाने में किशोर से मदद की अपील की थी और उन्हें पंचायत बैठक में आमंत्रित किया था।

किशोर ने भोजपुर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘पीड़ित परिवार की मांग बिल्कुल स्पष्ट है। उन्हें न तो पैसा चाहिए, न मुआवजा और न ही सरकारी नौकरी। उन्हें न्याय चाहिए और न्याय तभी मिलेगा जब उस व्यक्ति की हत्या करने वालों तथा ऐसा करने का आदेश देने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।’’

उन्होंने मांग की कि न्यायिक जांच किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश के बजाय कार्यरत न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए और जांच तीन महीने के भीतर पूरी की जाए।

किशोर ने कहा कि न्यायिक जांच का दायरा केवल जिला पुलिस प्रशासन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि बिहार के गृह विभाग, विशेष कार्य बल (एसटीएफ), पुलिस महानिदेशक और राज्य के गृह मंत्री की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए।

भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में बिलौती गांव के भरत भूषण तिवारी की पिछले सप्ताह पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मौत हो गई थी।

इस घटना को लेकर राज्य में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों ने इसे कथित रूप से फर्जी मुठभेड़ बताते हुए पुलिस पर न्यायेतर हत्या का आरोप लगाया है।

जन सुराज पार्टी ने रविवार को पटना में मोमबत्ती मार्च निकालकर तिवारी के लिए न्याय की मांग की थी।

इस बीच, बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने विपक्ष पर इस मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया।

उन्होंने पटना में संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना सभी को दुखी करने वाली है। सरकार ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। विपक्ष को इसका राजनीतिकरण करने के बजाय सरकार और न्यायिक समिति के साथ सहयोग करना चाहिए ताकि पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय मिल सके।’’

बिहार में कथित रूप से बढ़ रही मुठभेड़ों के संबंध में पूछे गए सवाल पर कुमार ने कहा कि पुलिस को आत्मरक्षा में कार्रवाई करने का अधिकार है।

उन्होंने कहा, ‘‘नीतीश कुमार के नेतृत्व में भी कानून का राज था और सम्राट चौधरी के नेतृत्व में भी है। यदि कोई पुलिसकर्मियों पर गोली चलाता है तो उन्हें आत्मरक्षा में कार्रवाई करने का अधिकार है।’’

मुठभेड़ के बाद अधिकारियों ने कहा था कि तिवारी लगातार पुलिस पर गोलीबारी कर रहा था, जिसके जवाब में आत्मरक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी थी।

हालांकि, सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में कथित तौर पर तिवारी मुठभेड़ से पहले हथियार डालते हुए नजर आ रहा है।

‘पीटीआई-भाषा’ इस वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सकी है।

तिवारी की मां की शिकायत के आधार पर इस मामले में घटना से जुड़े कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

प्रशांत किशोर ने चेतावनी दी कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।

भोजपुर जिले के बिलौती गांव में आयोजित ‘महापंचायत’ को संबोधित करते हुए किशोर ने कहा कि मामले में ‘‘पटना में बैठे शीर्ष अधिकारियों’’ की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो वह लोगों के साथ पटना जाकर मुख्यमंत्री से मुलाकात का प्रयास करेंगे और मुलाकात नहीं होने पर उनके आवास का घेराव करेंगे।

किशोर ने कहा, ‘‘जहां तक मेरी जानकारी है, भरत तिवारी कोई विक्षिप्त व्यक्ति नहीं था। वह इस क्षेत्र के लोगों को बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं दिलाने के लिए संघर्ष करने वाला व्यक्ति था। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने न्यायिक जांच के आदेश भले ही बाद में दिए हों, लेकिन मुठभेड़ पर उनकी शुरुआती प्रतिक्रिया उनकी असंवेदनशीलता को दर्शाती है।’’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘सम्राट चौधरी मानते हैं कि पुलिस का काम गोली चलाना है। हम उन्हें यह एहसास कराएंगे कि सत्ता जनता के हाथ में होती है और वह सम्राट की तरह व्यवहार नहीं कर सकते। पुलिस को रक्षक की जगह भक्षक बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती।’’

भाषा कैलाश

राजकुमार

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