भाजपा ने कई मोर्चों पर असम की जनता को धोखा दिया, जुबिन को न्याय दिलाने में नाकाम रही: सैकिया

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भाजपा ने कई मोर्चों पर असम की जनता को धोखा दिया, जुबिन को न्याय दिलाने में नाकाम रही: सैकिया

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  • Publish Date - March 29, 2026 / 04:45 PM IST,
    Updated On - March 29, 2026 / 04:45 PM IST

(दुर्बा घोष)

गुवाहाटी, 29 मार्च (भाषा) असम विधानसभा में निवर्तमान नेता प्रतिपक्ष देवव्रत सैकिया ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लोकप्रिय गायक जुबिन गर्ग को न्याय दिलाने में ‘‘नाकाम’’ रही है और इसने कई मोर्चों पर जनता के साथ “विश्वासघात” किया है।

सैकिया ने भरोसा जताया कि नौ अप्रैल के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस एवं उसके सहयोगी दल बेहतर प्रदर्शन करेंगे।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि भाजपा के “विश्वासघातों” की सूची लंबी है, लेकिन ‘‘अंतिम और सबसे गंभीर विश्वासघात जुबिन गर्ग के मामले में न्याय सुनिश्चित न कर पाना है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं लगातार मांग करता रहा कि इस मामले की कार्यवाही की सार्वजनिक निगरानी हो, लेकिन सरकार ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।’’

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि उन्होंने एक ऐसी समिति बनाने का सुझाव दिया था, जिसमें समाज के प्रतिष्ठित लोग शामिल हों और जो अदालत की दिन-प्रतिदिन की कार्यवाही एवं मामले में हो रहे घटनाक्रम पर नजर रखें, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन “अब तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है।”

गायक जुबिन गर्ग का पिछले वर्ष 19 सितंबर को सिंगापुर में डूबने से निधन हो गया था, जहां वह ‘नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल’ में शामिल होने गए थे।

उन्होंने भाजपा सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि उसने असम समझौते का उल्लंघन करते हुए कुछ लोगों को नागरिकता देकर राज्य की जनता के साथ ‘‘धोखा’’ किया है।

सैकिया ने कहा, “असम की जनता शुरू से ही नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ थी, लेकिन भाजपा ने उनकी भावनाओं की अनदेखी करते हुए इसे लागू किया।”

सीएए के अनुसार, बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के वे लोग जो 31 दिसंबर 2014 तक भारत में प्रवेश कर चुके हैं, उन्हें भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। वहीं, 1985 के असम समझौते में धर्म की परवाह किए बिना सभी “अवैध” प्रवासियों की पहचान करने और निर्वासित करने के लिए यह तारीख 25 मार्च 1971 तय की गई थी।

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने राज्य के चाय बागान श्रमिकों के साथ भी धोखा किया है। उन्होंने कहा कि मजदूरी में महज 30 रुपये की बढ़ोतरी कर सरकार ने अपनी संवेदनहीनता दिखाई है।

हाल में राज्य मंत्रिमंडल के फैसले में चाय बागान श्रमिकों की मजदूरी 30 रुपये बढ़ाई गई, जिसके बाद ब्रह्मपुत्र घाटी में मजदूरी 280 रुपये और बराक घाटी में 258 रुपये कर दी गई है।

जब उनसे वरिष्ठ नेताओं के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के प्रभाव के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इसे खारिज करते हुए कहा कि इससे पार्टी की चुनावी संभावनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

उन्होंने कहा, “वे अब प्रासंगिक नहीं रहे हैं और उनके जाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा, खासकर ऊपरी असम की सीटों पर।”

जब उनसे भाजपा के इस दावे पर सवाल किया गया कि सैकिया भी जल्द ही उस दल में शामिल हो सकते हैं, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनके पिता पूर्व मुख्यमंत्री हितेश्वर सैकिया व माता पूर्व मंत्री हेमप्रभा सैकिया दोनों कांग्रेस से जुड़े रहे हैं और भाजपा की यह बात कभी सच नहीं होगी।

सैकिया ने मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा द्वारा कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष गौरव गोगोई व उनकी पत्नी पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से संबंध होने के आरोपों को “पूरी तरह झूठा” करार दिया।

उन्होंने कहा, “वह (हिमंत) बहुत बड़े झूठे हैं, और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक मुख्यमंत्री इस स्तर तक गिर सकता है।”

असम की 126-सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव नौ अप्रैल को होंगे, जबकि मतगणना चार मई को की जाएगी।

भाषा खारी सुरेश

सुरेश