भाजपा ने बारुईपुर मुठभेड़ को ‘दैवीय न्याय’ बताया, तृणमूल कांग्रेस ने ‘जंगल राज’ करार दिया
भाजपा ने बारुईपुर मुठभेड़ को ‘दैवीय न्याय’ बताया, तृणमूल कांग्रेस ने ‘जंगल राज’ करार दिया
कोलकाता, आठ जुलाई (भाषा) पश्चिम बंगाल में बुधवार को बारुईपुर में 11 साल की बच्ची के कथित दुष्कर्म और हत्या से जुड़े मामले के मुख्य आरोपियों में एक की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद राज्य की सियासत गरमा गई। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जहां इस घटनाक्रम को “दैवीय न्याय” करार दिया, वहीं विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस ने इसे “जंगल राज” का उदाहरण बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की।
भाजपा ने 2013 में कामदुनी में 20 वर्षीय एक कॉलेज छात्रा के सामूहिक दुष्कर्म और हत्या से जुड़े मामले को फिर से खोलने की अपनी मांग भी दोहराई। पार्टी ने कहा कि मामले में न्याय अधूरा है और इसमें नये सिरे से जांच की जानी चाहिए।
भाजपा प्रवक्ता देबजीत सरकार ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “बारुईपुर में एक लड़की के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या करने वाला राक्षस प्रभास मंडल मंगलवार देर रात उस समय पुलिस की गोलीबारी में मारा गया, जब उसने हथियार छीनकर भागने की कोशिश की। दैवीय न्याय!”
हालांकि, तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ नेता महुआ मोइत्रा ने बारुईपुर दुष्कर्म-हत्याकांड के आरोपी की मौत के मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए।
महुआ ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “बारुईपुर दुष्कर्म-हत्याकांड का आरोपी प्रभास मंडल पुलिस मुठभेड़ में मारा गया! पश्चिम बंगाल पुलिस आखिर हो क्या रहा है? बंगाल के लोग कृपया नये बंगाल-उत्तर प्रदेश 2.0 का स्वागत करें। बंगाल भाजपा कोई सरकार नहीं है। यह जंगल राज है।”
पश्चिम बंगाल पुलिस का दावा है कि मंडल पूछताछ के दौरान जांचकर्ताओं को कथित तौर पर गुमराह कर रहा था और जांच में सहयोग नहीं कर रहा था, जिसके कारण जांच टीम घटना की कड़ियों को जोड़ने और अपराध में उसकी भूमिका का पता लगाने के लिए उसे मंगलवार रात 12 बजकर 45 मिनट पर दक्षिण 24 परगना जिले स्थित बारुईपुर के सूर्यपुर ले गई।
पुलिस ने कहा कि इसी दौरान मंडल ने अचानक एक पुलिसकर्मी से उसकी सरकारी पिस्तौल छीनी और भागने का प्रयास किया।
पुलिस के मुताबिक, मंडल ने पुलिस टीम पर गोली भी चलाई। उसने कहा कि पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें मंडल घायल हो गया।
पुलिस के अनुसार, मंडल को बारुईपुर उप-मंडल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना को लेकर बढ़ते जन आक्रोश के बीच हुई यह मुठभेड़ बंगाल में मई में भाजपा के सत्ता में आने के बाद इस तरह की पहली पुलिस कार्रवाई है।
वरिष्ठ तृणमूल सांसद सौगत रॉय ने ‘पीटीआई वीडियो’ से बातचीत में कहा, “मैं बारुईपुर के आरोपी प्रभास मंडल की मुठभेड़ में हुई मौत की निंदा करता हूं। इससे पता चलता है कि सरकार का पुलिस पर कोई नियंत्रण नहीं है। यह पुलिस की बर्बरता का सबसे बुरा स्वरूप है।”
उन्होंने कहा, “कल मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दोनों बारुईपुर में थे। डीजीपी से 72 घंटे के भीतर अंतिम रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था। इसी अवधि में मुठभेड़ में एक मौत हो गई। डीजीपी को उस जगह पर जाना चाहिए और मुठभेड़ में हुई मौत पर रिपोर्ट देनी चाहिए। यह ‘योगी मॉडल’ है, जिसे बंगाल में अपनाया जा रहा है। राज्य में कानून-व्यवस्था चरमरा गई है।’’
भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने तृणमूल कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी के पास ऐसे दावे करने का कोई आधार नहीं है, क्योंकि राज्य की जनता उसे “पहले ही नकार चुकी है।”
भट्टाचार्य ने संवाददाताओं से कहा, “किसी भी अपराधी या बलात्कारी को बख्शा नहीं जाएगा। चुनाव से पहले भाजपा ने पश्चिम बंगाल की महिलाओं से ‘भय खत्म, भरोसा कायम’ का वादा किया था। यह प्रधानमंत्री का संदेश था। हम वही कर रहे हैं, जो हमने अपने घोषणापत्र में कहा था। मौजूदा राज्य सरकार ने अपराध को कतई बर्दाश्त न करने की नीति के तहत जरूरी कदम उठाए हैं।”
उन्होंने कामदुनी सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले की फाइल फिर से खोलने और अपराधियों को सजा दिलाने की भाजपा की मांग दोहराई।
भट्टाचार्य ने आरोप लगाया, “पिछली तृणमूल सरकार ने एक खास समुदाय को खुश करने के लिए मामले की जांच इस तरह से की थी कि कामदुनी कांड के मुख्य आरोपी रिहा हो गए और पीड़िता को न्याय नहीं मिला। अब समय बदल गया है। इसलिए हमने सरकार से कामदुनी मामले की फाइल फिर से खोलने की मांग की है।”
इस जघन्य अपराध के खिलाफ चलाए गए कामदुनी जन-आंदोलन का प्रमुख चेहरा मौसमी कायल ने बारुईपुर में पुलिस मुठभेड़ का स्वागत करते हुए इसे “असुर वध” की शुरुआत बताया।
कायल ने कहा, ‘‘हम पिछले 13 वर्षों से न्याय के लिए लड़ रहे हैं, लेकिन पिछली तृणमूल सरकार बलात्कारियों और हत्यारों के साथ खड़ी रही और उन्हें जेल से रिहा कर दिया। नयी सरकार की कार्रवाई से हमें सुकून मिला है।”
उन्होंने कहा, “जांच तेजी से होनी चाहिए, आरोपियों से जुर्म कबूल करवाना चाहिए और फिर उनका एनकाउंटर कर देना चाहिए। यही न्याय है। बलात्कारियों के लिए यही असली सजा है।”
कामदुनी जन-आंदोलन में प्रमुखता से शामिल टुंपा कायल ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार ने आरोपियों को बरी कराने के लिए “14 बार सरकारी वकील बदले” थे।
उन्होंने कहा, “अगर पिछली सरकार ऐसे अपराधों से सख्ती से निपटती, तो बारुईपुर में नाबालिग लड़की को इतनी हिंसक और दर्दनाक मौत का सामना न करना पड़ता।”
भाषा पारुल शफीक
शफीक

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