नयी दिल्ली, 20 मार्च (भाषा) भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के बीच अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के सर्वकालिक निचले स्तर पर गिरने के बाद, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को यह ‘‘बड़प्पन’’ तो दिखाना चाहिए कि वह अपने उस पूर्व दावे को वापस ले ले जिसमें उसने कहा था कि संप्रग सरकार के दौरान भारतीय मुद्रा की गिरावट किसी तरह तत्कालीन प्रधानमंत्री की गलती थी।
थरूर ने यहां एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से कहा कि यह गिरावट ‘‘हमारी सरकार के नियंत्रण से परे अंतरराष्ट्रीय ताकतों के कारण’’ है और यह इस बात को स्पष्ट करती है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के सत्ता में रहने के दौरान क्या हुआ था।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में, रुपया शुक्रवार को 64 पैसे की बड़ी गिरावट के साथ अब तक के सबसे निचले स्तर 93.53 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ने के बीच विदेशी पूंजी की सतत निकासी और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल से रुपये पर दबाव है।
मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति के कारण निवेशकों का भरोसा कम होने से रुपये में गिरावट आई है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘हम कुछ समय से यही देख रहे हैं। मेरा मानना है कि सरकार को कम से कम इतना बड़प्पन तो दिखाना चाहिए कि वह अपने उस पूर्व दावे को वापस ले ले जिसमें उसने कहा था कि संप्रग सरकार के दौरान रुपये के गिरने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री जिम्मेदार थे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह गिरावट अंतरराष्ट्रीय कारकों के कारण है, जो हमारी सरकार के नियंत्रण से बाहर हैं और मेरा मानना है कि इससे हमारे कार्यकाल के दौरान जो हुआ था, उसे भी सही संदर्भ में समझा जा सकता है।’’
थरूर ने कहा, ‘‘इसलिए मुझे लगता है कि इन दिनों रुपया काफी उतार-चढ़ाव से गुजर रहा है और अगर यह डॉलर के मुकाबले गिर गया है, तो यूरो, स्विस फ्रैंक या अन्य मुद्राओं के मुकाबले इसकी स्थिति और भी खराब है, इसलिए हमारी स्थिति अच्छी नहीं है।’’
उन्होंने कहा कि जिन लोगों को विदेश यात्रा करने या आयातकों के लिए विदेशी देशों से सामान खरीदने की आवश्यकता है, उनके लिए यह ‘वास्तव में मुश्किल समय’ है।
थरूर ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर कहा कि आस पास के क्षेत्रों और फिर भारत समेत पूरे क्षेत्र को जो नुकसान हो रहा है, वह ‘‘सभी स्वीकार्य सीमाओं को पार कर चुका है’’ और इसे रोकना होगा।
उन्होंने कहा कि इस संघर्ष और अधिकतर संघर्षों में वह हमेशा ‘‘शांति’’ के पक्षधर रहे हैं।
थरूर ने कहा, ‘‘यह एक गंभीर मुद्दा है। यह कोई मामूली बात नहीं है, इसका असर भारतीयों और दुनिया भर आम लोगों के जीवन पर पड़ रहा है। मेरा मानना है कि हमें इन प्रयासों में शामिल होना चाहिए और आदर्श रूप से हमें इस युद्ध को समाप्त करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय प्रयास का नेतृत्व करना चाहिए। कई देश हमारे साथ जुड़ेंगे। कोई भी इस युद्ध को जारी रहने नहीं देखना चाहता।’’
भाषा देवेंद्र सुरभि
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