गोवा के खनन क्षेत्र को स्थायी और पारदर्शी तरीके से पुनर्जीवित करने की मांग की भाजपा सदस्य ने

गोवा के खनन क्षेत्र को स्थायी और पारदर्शी तरीके से पुनर्जीवित करने की मांग की भाजपा सदस्य ने

गोवा के खनन क्षेत्र को स्थायी और पारदर्शी तरीके से पुनर्जीवित करने की मांग की भाजपा सदस्य ने
Modified Date: August 6, 2026 / 12:24 pm IST
Published Date: August 6, 2026 12:24 pm IST

नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) भाजपा के राज्यसभा सदस्य सदानंद महालू शेट तानवड़े ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि गोवा में वर्ष 2012 में खनन गतिविधियां बंद होने के बाद राज्य की अर्थव्यवस्था और हजारों परिवारों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने केंद्र से खनन क्षेत्र को स्थायी और पारदर्शी तरीके से पुनर्जीवित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया।

शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए तानवड़े ने कहा कि गोवा लंबे समय तक लौह अयस्क खनन के लिए देश के प्रमुख राज्यों में रहा है और राज्य की अर्थव्यवस्था, रोजगार तथा राजस्व का एक बड़ा हिस्सा इस क्षेत्र पर निर्भर था।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में खनन गतिविधियों पर रोक लगने के बाद हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार प्रभावित हुए तथा परिवहन, मशीनरी, बंदरगाह और अन्य सहायक उद्योगों पर भी इसका असर पड़ा।

उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के विभिन्न आदेशों और उसके बाद अपनाई गई नई व्यवस्था के तहत खनिज पट्टों के आवंटन और खनन गतिविधियों को लेकर प्रक्रिया निर्धारित की गई, लेकिन इसके बावजूद राज्य में खनन क्षेत्र अभी भी अपनी पूरी क्षमता के साथ संचालित नहीं हो पा रहा है। इससे स्थानीय लोगों, विशेषकर खनन पर निर्भर परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

भाजपा सदस्य ने सरकार से अनुरोध किया कि गोवा में खनन क्षेत्र से जुड़े लंबित मुद्दों का शीघ्र समाधान किया जाए और ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे पर्यावरण संरक्षण तथा स्थानीय समुदायों के हितों को ध्यान में रखते हुए खनन गतिविधियां नियमित और पारदर्शी ढंग से संचालित हो सकें।

उन्होंने कहा कि इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी।

भाषा मनीषा माधव

माधव


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