गुपचुप तरीके से एनआरसी लागू करने के लिए बंगालियों निशाना बना रही भाजपा: ममता बनर्जी

गुपचुप तरीके से एनआरसी लागू करने के लिए बंगालियों निशाना बना रही भाजपा: ममता बनर्जी

गुपचुप तरीके से एनआरसी लागू करने के लिए बंगालियों निशाना बना रही भाजपा: ममता बनर्जी
Modified Date: August 6, 2025 / 11:03 pm IST
Published Date: August 6, 2025 11:03 pm IST

झारग्राम, छह अगस्त (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को भाजपा पर मतदाता सूची में गड़बड़ी करके बांग्ला भाषी प्रवासियों को परेशान करने की साजिश रचने का आरोप लगाया।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर वास्तविक मतदाताओं को मताधिकार से वंचित किया गया तो वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बंगाल और बंगालियों के प्रति केंद्र सरकार के कथित उत्पीड़न का पर्दाफाश करेंगी।

बनर्जी ने कहा कि अगर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार नागरिकता सत्यापन और मतदाता सूची के संशोधन की आड़ में संवेदनशील समुदायों को निशाना बनाने के प्रयास जारी रखती है, तो वह इस मुद्दे को वैश्विक मंच पर ले जाएंगी।

बनर्जी ने कहा, ‘‘अगर वे असली बंगालियों के नाम मतदाता सूची से हटाते हैं, तो मैं दुनिया भर में घूमकर उनके (भाजपा के) असली चेहरे उजागर करूंगी।’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं बाहरी दुनिया से अपने देश के बारे में कभी बात नहीं करती। लेकिन अगर ऐसा ही चलता रहा, तो मैं चुप नहीं रहूंगी। अगर बंगाल पर अत्याचार हुआ, तो मैं पूरी दुनिया को बताऊंगी कि यह सरकार हमें कैसे प्रताड़ित कर रही है।’’

आदिवासी बहुल झारग्राम से आए प्रवासी परिवारों, छात्रों और नेताओं की एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिए अल्पसंख्यकों, आदिवासियों और विपक्षी दलों के समर्थकों को व्यवस्थित रूप से मताधिकार से वंचित करने के लिए ‘गुपचुप तरीके से एनआरसी’ की नींव रख रही है।

तीन किलोमीटर लंबे विरोध मार्च में हिस्सा लेने के बाद बनर्जी ने कहा, ‘‘वे कह रहे हैं कि बांग्ला नाम की कोई भाषा नहीं है। मैं उन्हें दुनिया के सामने बेनकाब कर दूंगी। अगर आप बांग्ला भाषा या बंगाल के लोगों पर हमला करेंगे, तो मैं चुप नहीं रहूंगी।’’

विरोध मार्च में तृणमूल नेता, सांस्कृतिक हस्तियां और आम लोग शामिल हुए। उनके हाथों में तख्तियां थीं, जिनपर बंगाल का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और बंगाल, मेरी मां, जैसे नारे लिखे थे।

यह विरोध प्रदर्शन देश के विभिन्न हिस्सों में बांग्ला भाषी प्रवासियों के कथित उत्पीड़न के मद्देनजर आयोजित किया गया।

भाषा राजकुमार जोहेब

जोहेब


लेखक के बारे में