भाजपा का दबदबा कम से कम 20 साल तक रहेगा: प्रदीप गुप्ता

भाजपा का दबदबा कम से कम 20 साल तक रहेगा: प्रदीप गुप्ता

भाजपा का दबदबा कम से कम 20 साल तक रहेगा: प्रदीप गुप्ता
Modified Date: May 21, 2026 / 12:39 pm IST
Published Date: May 21, 2026 12:39 pm IST

( तस्वीरों सहित )

नयी दिल्ली, 21 मई (भाषा) चुनाव विश्लेषक प्रदीप गुप्ता ने कहा है कि 2014 में शुरू हुआ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राजनीतिक दबदबे का मौजूदा दौर ‘‘कम से कम 20 साल’’ तक जारी रह सकता है।

‘द एक्सिस माई इंडिया’ सर्वेक्षण संस्था के प्रमुख गुप्ता ने तर्क दिया कि सत्तारूढ़ दल की स्थिति तब तक सुरक्षित रहेगी जब तक उसके शासन का प्रदर्शन बहुत कमजोर नहीं हो जाता।

कांग्रेस के लंबे समय तक रहे राजनीतिक प्रभुत्व के साथ तुलना करते हुए, गुप्ता ने कहा कि भारतीय राजनीति एक पार्टी के प्रभाव के एक और दौर की साक्षी बन रही है।

गुप्ता ने बुधवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘‘राजनीति में एक सीमा होती है। पहले, कांग्रेस ने 1977 तक लगातार शासन किया। उसके बाद, उसे मुश्किलें आने लगीं। उन दिनों, हम लगभग 20 साल तक चलने वाली राजनीतिक पीढ़ी की बात करते थे। वह 20 साल का दौर अब भी बना रहेगा।’’

उन्होंने कहा कि भाजपा भी इसी तरह लंबे समय तक भारतीय राजनीति का केंद्रीय ध्रुव बनी रह सकती है।

उनके विचार में, सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष दोनों का भविष्य काफी हद तक मौजूदा सरकार के कामकाज पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा, ‘‘इतना बड़ा जनादेश मिलने के बाद, भाजपा से उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। इसलिए भाजपा और राजग को अब शानदार कामकाज करना होगा।’’

गुप्ता ने कहा, ‘‘जब तक उनका प्रदर्शन कमजोर या खराब नहीं होता, वे जीतते रहेंगे और विपक्ष हारता रहेगा।’’

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पर पहले कुशासन रहने की धारणाओं से जुड़े ‘विरासत में मिले मुद्दों’ का बोझ बना हुआ है जिससे उसके राजनीतिक नुकसान की भरपाई एक लंबी प्रक्रिया बन गई है।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप 2029 की भी बात करें, तो इसका मतलब होगा लगभग 15 साल (कांग्रेस के लिए सत्ता से बाहर रहने के)। मुझे लगता है कि उन्हें पूरे देश को मनाने में कम से कम पांच साल और लग सकते हैं।’’

गुप्ता ने यह भी कहा कि राजनीतिक प्रभुत्व ने जनता की आकांक्षाएं भी बढ़ा दी हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जब आप बड़ी ऊंचाइयों पर पहुंचते हैं, तो बाद में नीचे आने की भी प्रवृत्ति बनी रहती है। भाजपा भी उस स्तर पर पहुंच गई है जहां उससे आकांक्षाएं बढ़ गई हैं।’’

भाषा वैभव मनीषा

मनीषा


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