भाजपा की रणनीति उन राज्यों में सहयोगियों को हाशिये पर धकेलने की है, जहां उसका बहुमत नहीं है: सिब्बल
भाजपा की रणनीति उन राज्यों में सहयोगियों को हाशिये पर धकेलने की है, जहां उसका बहुमत नहीं है: सिब्बल
नयी दिल्ली, 18 जनवरी (भाषा) राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने रविवार को कहा कि जिन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्ता में नहीं है या बहुमत में नहीं है, वहां उसकी रणनीति अन्य दलों के साथ गठबंधन करना, सत्ता में आना और फिर उन्हें हाशिये पर धकेल देना है।
सिब्बल ने कहा कि यह रणनीति बिहार में सफल रही और अब महाराष्ट्र में भी इसे लागू किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के निकाय चुनाव में विपक्ष और छोटे दलों के लिए संदेश यह था कि अगर वे भाजपा के साथ जाएंगे, तो उन्हें हाशिए पर डाल दिया जाएगा।
सिब्बल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘भाजपा की राजनीतिक रणनीति: जिन राज्यों में वे सत्ता में नहीं हैं या बहुमत में नहीं हैं, वहां अन्य राजनीतिक दलों से गठबंधन करो, सत्ता में आओ और फिर उन्हें हाशिये पर डाल दो।’’
राज्यसभा सदस्य सिब्बल ने लिखा, ‘‘यह रणनीति बिहार में सफल रही। अब महाराष्ट्र में इसे लागू किया जा रहा है।’’
बाद में, सिब्बल ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि महाराष्ट्र के निकाय चुनाव ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर के चुनावों दोनों के लिए कुछ संदेश दिए हैं।
सिब्बल ने कहा, ‘‘सबसे पहले, मैं लोगों को बताना चाहता हूं कि बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) का वार्षिक बजट 74,000 करोड़ रुपये का है, इसलिए यह बहुत महत्वपूर्ण है। पिछले निकाय चुनाव में, तब अविभाजित रही शिवसेना ने जीत हासिल की थी और वह बीएमसी की सत्ता में थी।’’ उन्होंने यह भी कहा कि अब शिवसेना का शिंदे गुट इसका नियंत्रण खो चुका है।
उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 2012 में भाजपा को केवल 31 सीट मिली थीं। 2017 में 82 और इस बार 89 सीट मिलीं। शिवसेना को 2012 में 74, 2017 में 84 और अब 29 सीट मिलीं। कांग्रेस को 2012 में 52, 2017 में 31 और अब 24 सीट मिलीं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को 2012 में 13, 2017 में 9 और अब 3 सीट मिलीं। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को 2012 में 28, 2017 में 7 और अब 6 सीट मिलीं। इस तरह, सिवाय भाजपा के सभी दलों का ग्राफ नीचे जा रहा है।’’
सिब्बल ने कहा कि यह भाजपा की चुनाव रणनीति रही है। उन्होंने कहा, ‘‘जहां उन्हें अपनी कमजोरी लगती है, वहां वे किसी छोटी पार्टी के साथ गठबंधन करते हैं और अंततः सत्ता में आकर उसे हाशिए पर डाल देते हैं।’’ उन्होंने हरियाणा में लोक दल और बिहार में जनता दल (यूनाइटेड) का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि यह उन दलों के लिए संदेश है जो भाजपा के साथ गठबंधन करते हैं।
सिब्बल ने कहा, ‘‘देखिए, अजित पवार के साथ क्या हुआ। अब शिंदे ने भी विजेताओं को होटल में रखा है क्योंकि उन्हें पता है कि भाजपा नेताओं को खरीदती और तोड़ती है।’’
उन्होंने दावा किया कि इन चुनावों ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि शिवसेना उद्धव ठाकरे की है, न कि एकनाथ शिंदे की।
राज्यसभा सदस्य ने कहा कि देश की राजनीति उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव के इर्द-गिर्द बंटी हुई है, जहां उत्तरी ध्रुव भाजपा है और दक्षिणी ध्रुव कांग्रेस, जबकि जब कांग्रेस सत्ता में थी तो स्थिति उलट थी।
सिब्बल ने कहा, ‘‘छोटे दलों को यह तय करना होगा कि वे भाजपा के साथ जाकर हाशिए पर चले जाएं या विपक्ष के साथ मिलकर उसके खिलाफ लड़ें।’’
महाराष्ट्र निकाय चुनाव में भाजपा ने 2,869 सीट में से 1,425 सीट जीतकर बड़ी सफलता हासिल की और मुंबई एवं पुणे सहित एक दर्जन से अधिक नगर निकायों में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। इसके साथ ही पार्टी ने ठाकरे और पवार परिवारों के गढ़ में भी सेंध लगा दी।
भाषा अमित नेत्रपाल
नेत्रपाल

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