पीएलए के 13 संदिग्ध कैडर के शवों को कानूनी प्रक्रिया, अंतिम संस्कार के लिए इंफाल लाया गया

पीएलए के 13 संदिग्ध कैडर के शवों को कानूनी प्रक्रिया, अंतिम संस्कार के लिए इंफाल लाया गया

पीएलए के 13 संदिग्ध कैडर के शवों को कानूनी प्रक्रिया, अंतिम संस्कार के लिए इंफाल लाया गया
Modified Date: December 5, 2023 / 07:31 pm IST
Published Date: December 5, 2023 7:31 pm IST

इंफाल, पांच दिसंबर (भाषा) भारत-म्यांमा सीमा के पास घात लगाकर किए गए हमले में मारे गए प्रतिबंधित संगठन पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के 13 संदिग्ध कैडर के शवों को पोस्टमॉर्टम और कानूनी प्रक्रिया के लिए इंफाल लाया गया। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने कहा कि दो किशोरों सहित ये सभी लोग शायद पीएलए द्वारा संचालित शिविर में हथियारों के प्रशिक्षण के लिए म्यांमा में घुसने का प्रयास करने वाले एक समूह का हिस्सा थे।

पीएलए एक विद्रोही समूह है जिसमें मुख्य रूप से घाटी क्षेत्र के मेइती समुदाय के सदस्य हैं। कड़े गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत इस संगठन पर केंद्र का प्रतिबंध हाल में पांच साल के लिए बढ़ाया गया था।

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अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को मारे गए लोगों में सबसे बड़ा 47 साल का था और सबसे छोटा 17 साल का था। सुरक्षाकर्मी फिलहाल समूह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रहे हैं जो लीथू गांव की पहाड़ियों में हुई गोलीबारी के दौरान भागने में सफल रहे। लीथू गांव से म्यांमा की सीमा 15 किलोमीटर दूर है।

अधिकारियों ने बताया कि शवों को पोस्टमॉर्टम और कानूनी प्रक्रियाओं के लिए यहां जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान लाया गया है। संस्थान और उसके आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

लीथू गांव तेंगनौपाल जिले में स्थित है। मणिपुर में जातीय संघर्ष के दौरान यह क्षेत्र प्रभावित नहीं हुआ था। तेंगनौपाल जिले की सीमा म्यांमा से लगती है। गांव में कोई सड़क संपर्क नहीं है और अक्सर उग्रवादी समूहों द्वारा म्यांमा जाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।

भाषा आशीष पवनेश

पवनेश


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