अतीत की चिंताओं से मुक्त साझेदारी का निर्माण हो: नेपाल के विदेश मंत्री ने भारत के साथ संबंधों पर कहा
अतीत की चिंताओं से मुक्त साझेदारी का निर्माण हो: नेपाल के विदेश मंत्री ने भारत के साथ संबंधों पर कहा
नयी दिल्ली, सात जून (भाषा) नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने रविवार को कहा कि नेपाल भारत के साथ अपने सीमा विवाद को मौजूदा द्विपक्षीय तंत्रों के माध्यम से हल करना चाहता है क्योंकि जब दोनों पक्ष खुले दिल, तर्कसंगत दिमाग और आपसी सम्मान के साथ मिलते हैं तो ‘कोई भी समस्या बहुत बड़ी और जटिल नहीं होती’।
नेपाल के विदेश मंत्री ने किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप को अस्वीकार करने के नई दिल्ली के रुख का प्रभावी रूप से समर्थन किया।
खनाल ने कहा कि नेपाल की नयी सरकार भारत को ‘‘21वीं सदी की भू-राजनीति के विकृत, अति संवेदनशील नजरिए’’ से नहीं देखती बल्कि दोनों देशों की समग्र समृद्धि के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंध बनाना चाहती है।’’
नेपाल के विदेश मंत्री अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर के साथ व्यापक वार्ता करने के एक दिन बाद मीडिया से बात कर रहे थे।
दोनों विदेश मंत्रियों ने व्यापार, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी, कनेक्टिविटी और ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में संबंधों को और अधिक विस्तारित करने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित किया।
खनाल की भारत की तीन दिवसीय यात्रा शुक्रवार को शुरू हुई और यह यात्रा ऐसे वक्त हुई है जब नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के दोनों पक्षों के बीच सीमा विवाद पर हाल ही में दिए गए बयान से तीव्र विवाद उपजा है। शाह ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए चीन और ब्रिटेन की भागीदारी का भी सुझाव दिया था।
नेपाल के विदेश मंत्री ने भारत के तेजी से वैश्विक आर्थिक और तकनीकी महाशक्ति में परिवर्तित होने को स्वीकार करते हुए, इस ‘गतिशील पड़ोसी’ के साथ साझेदारी की इच्छा व्यक्त की।
उन्होंने कहा, ‘‘ हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी कागज़ पर किए गए बड़े-बड़े वादों और ज़मीनी हकीकत के बीच के अंतर को कम करना है, अमूर्त राजनीतिक बयानों से हटकर ठोस, जीवन बदलने वाले परिणाम देना है।’’
खनाल ने कहा, ‘‘आइए हम एक ऐसी साझेदारी का निर्माण करें जो अतीत की चिंताओं से बंधी न हो, बल्कि हमारे साझा भविष्य की उच्च आशाओं और उज्ज्वल संभावनाओं से प्रेरित हो।’’
नेपाल के विदेश मंत्री ने सीमा विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘वास्तविक परस्पर निर्भरता’ का अर्थ यह है कि साझा सीमाएं ‘बेहद प्रभावी पुल’ की तरह काम करें, न कि ‘निराशाजनक बाधाओं’ की तरह।’’
नेपाल और भारत के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर पुराना सीमा विवाद है। भारत का दावा है कि ये क्षेत्र उत्तराखंड का हिस्सा हैं।
पिछले महीने के अंत में, नेपाल के प्रधानमंत्री शाह ने भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को सुलझाने के लिए चीन और ब्रिटेन की सहभागिता की मांग की थी। नयी दिल्ली ने इस विवाद को सुलझाने में किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया था।
नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा कि ब्रिटेन की सहभागिता का मतलब ब्रिटिश पुस्तकालयों और संग्रहालयों से दस्तावेज और ऐतिहासिक विवरण प्राप्त करना था।
उन्होंने कहा, ‘‘ हम अपने विवादों को राजनयिक प्रक्रियाओं के माध्यम से हल करना चाहते हैं। हम बस यह देखना चाहते हैं कि क्या हम ब्रिटेन के पुस्तकालयों या संग्रहालयों में मौजूद कुछ दस्तावेजों तक पहुंच सकते हैं। हमारा रुख मध्यस्थता की मांग करने का नहीं था।’
नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘ अति-राष्ट्रवादी प्रदर्शन में संलग्न होने के बजाय, हम सद्भावना से चुनौतियों का समाधान करने के लिए शांति, डेटा-आधारित और साक्ष्य-आधारित चर्चाओं का अनुसरण कर रहे हैं।’’
लिपुलेख क्षेत्र से होकर कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल की आपत्ति के बारे में पूछे जाने पर, खनाल ने कहा कि काठमांडू की चिंताएं भारत और चीन के बीच नेपाल से परामर्श किए बिना तीर्थयात्रा के लिए इस मार्ग का उपयोग करने की सहमति से उपजी हैं, और दावा किया कि यह क्षेत्र उनके देश का है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी चिंता कालापानी और लिपुलेख क्षेत्र को लेकर भारत और चीन के बीच हुए समझौते के नवीनीकरण को लेकर है, जहां हम बहुत लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि यह जमीन हमारी है, और नेपाल की सहमति के बिना दोनों देश अपने आप ऐसे समझौते नहीं कर सकते।’
उन्होंने कहा, ‘हमने दोनों देशों को भेजे गए राजनयिक पत्रों सहित संचार के अन्य माध्यम से यह बात स्पष्ट रूप से बता दी है।’
साथ ही, नेपाली विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि नेपाल मौजूदा द्विपक्षीय तंत्रों के माध्यम से भारत के साथ इस मुद्दे का समाधान चाहता है।
खनाल ने कहा कि नेपाल की नयी सरकार की भारत के साथ संबंधों को और गहरा करने की प्रबल इच्छा है।
खनाल ने कहा, ‘‘जब हम सीमा पार देखते हैं, तो हमें एक उभरता हुआ भारत दिखाई देता है – एक ऐसा भारत जिसने वैश्विक मंच पर एक गतिशील, तेजी से विकसित हो रही प्रौद्योगिकी और आर्थिक महाशक्ति के रूप में खुद को मौलिक रूप से एवं खूबसूरती से पुनर्परिभाषित किया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम महत्वाकांक्षी और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी से परिपूर्ण भारत के साथ जुड़ना चाहते हैं।’’
भाषा शोभना नरेश
नरेश

Facebook


