पश्चिम बंगाल की तीन रास सीट के लिए उपचुनाव: सभी पर भाजपा के जीतने की प्रबल संभावना
पश्चिम बंगाल की तीन रास सीट के लिए उपचुनाव: सभी पर भाजपा के जीतने की प्रबल संभावना
कोलकाता, छह जुलाई (भाषा)निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा कर दी है। आयोग की इस घोषणा के बाद जहाँ तीनों सीटों पर भाजपा की जीत की प्रबल संभावना दिख रही है, वहीं बंटी हुई तृणमूल कांग्रेस की ताकत संसद में और कम हो सकती है।
निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार 24 जुलाई को उपचुनाव होगा। ये सीट तृणमूल कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सदस्यों सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक के इस्तीफे की वजह से खाली हुई हैं। इन नेताओं ने विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए थे और जून में संसद के उच्च सदन और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया था।
रॉय और बड़ाईक का कार्यकाल सितंबर 2029 तक था, जबकि देव का कार्यकाल अप्रैल 2030 में समाप्त होता।
तृणमूल कांग्रेस के इस समय राज्यसभा में नौ सदस्य हैं।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास पश्चिमी बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में कुल 208 सदस्य हैं, इसलिए आंकड़े पूरी तरह से पार्टी के पक्ष में हैं। अगर पार्टी तीन उम्मीदवार उतारती है और उसके विधायक पार्टी के निर्देश के अनुसार मतदान करते हैं, तो पार्टी अपने उम्मीदवारों के लिए क्रमशः लगभग 70, 69 और 69 वोट आसानी से हासिल कर सकती है, जिससे तीनों सीट पर उपचुनावों में उसकी जीत की प्रबल संभावना है।
राज्यसभा चुनाव प्रणाली के तहत, तीन सीट के लिए होने वाले उपचुनाव में किसी उम्मीदवार को जीतने के लिए करीब 70 ‘प्रथम वरीयता’ वाले मतों की जरूरत होगी।
विधानसभा में भाजपा की मौजूदा ताकत के मद्देनजर वह दूसरे दलों के समर्थन पर निर्भर रहे बिना तीन उम्मीदवारों के लिए जरूरी संख्या बल जुटा सकती है।
यह गणित मुख्य विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के सामने मौजूद चुनौती को भी दर्शाता है।
भाजपा उम्मीदवार को हराने के लिए किसी भी विरोधी उम्मीदवार को कम से कम 70 मतों की जरूरत होगी। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुने गए विधायकों की कुल संख्या अब भी लगभग 80 है, लेकिन पार्टी का विधायक दल अब ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट और विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के बीच बंट गया है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक सैद्धांतिक रूप से, एकजुट तृणमूल कांग्रेस एक उम्मीदवार को जिताने की ताकत रखती है। हालांकि, संगठन के भीतर गहराते झगड़े के कारण ऐसी समझ बनने की संभावना कम होती जा रही है।
इसलिए, उपचुनावों का महत्व केवल आंकड़ों के खेल से कहीं अधिक है।
यह उपचुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं, जब तृणमूल कांग्रेस पार्टी पर नियंत्रण के लिए अभूतपूर्व लड़ाई में उलझी हुई है। विरोधी गुट एक ही समय में निर्वाचन आयोग के सामने पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक ढांचे पर अपना दावा ठोक रहे हैं।
ममता बनर्जी नीत गुट ने राज्यसभा में संभावित झटके को अधिक महत्व नहीं देने की कोशिश की है। उसकी दलील है कि ये खाली सीटें उन नेताओं के ‘विश्वासघात’ का नतीजा हैं, जिन्होंने संकट के समय पार्टी छोड़ दी है।
ममता समर्थक एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘ये सीटें तृणमूल की थीं और पार्टी ने पिछले विधानसभा चुनाव में अपनी ताकत के दम पर इन्हें जीता था। इस साल हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद कुछ लोगों ने पार्टी छोड़ दी। बंगाल की जनता देख रही है कि मुश्किल समय में कौन उनके साथ खड़ा रहा और किसने उन्हें छोड़ दिया।’’
हालांकि, बागी गुट का कहना है कि इस्तीफे पार्टी के नेतृत्व के प्रति कम होते भरोसे को दर्शाते हैं।
बागी धड़े के एक नेता ने कहा, ‘‘ये इस्तीफे अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक संदेश का हिस्सा हैं। नेतृत्व ने संगठन के भीतर से मिली बार-बार की चेतावनियों को नजरअंदाज़ किया और विधानसभा चुनाव में इसके परिणाम सामने आ गए। असली मुद्दा राज्यसभा की सीटें नहीं हैं, बल्कि यह है कि इतने सारे चुने हुए प्रतिनिधियों का मौजूदा नेतृत्व पर भरोसा क्यों नहीं रहा।’’
बागी गुट ने अपनी ताकत तब दिखाई, जब तृणमूल के 80 में से 58 विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के उम्मीदवार को नकारते हुए, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए ऋतब्रत बनर्जी के दावे का समर्थन किया। अब यह गुट लगभग 65 विधायकों के समर्थन का दावा करता है और खुद को पार्टी की राजनीतिक विरासत का असली उत्तराधिकारी बताता है।
इस बीच, भाजपा ने कहा कि उपचुनाव राज्य में हो रहे बड़े राजनीतिक बदलावों को दर्शाते हैं।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘नतीजा काफी हद तक विधानसभा के मौजूदा गणित पर निर्भर है। तृणमूल कांग्रेस आपस में ही लड़ रही है, जबकि भाजपा का ध्यान शासन और संगठन पर है। राज्यसभा में हमारी संख्या में बढ़ोतरी उस जनादेश को प्रतिबिंबित करेगा, जो बंगाल ने हमें दिया है।’’
राज्यसभा उपचुनाव निर्वाचन आयोग के सामने चल रही कार्यवाही के साथ-साथ आगे बढ़ रहा है। आयोग ने तृणमूल के दोनों गुटों से पार्टी की पहचान पर अपने-अपने दावों के समर्थन में दस्तावेजी सबूत और संगठन से जुड़े रिकॉर्ड जमा करने को कहा है।
भाषा धीरज दिलीप
दिलीप

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