क्या मौजूदा मुख्यमंत्री के अपराध की जांच सीबीआई कर सकती है: ईडी ने न्यायालय से फैसला करने को कहा

क्या मौजूदा मुख्यमंत्री के अपराध की जांच सीबीआई कर सकती है: ईडी ने न्यायालय से फैसला करने को कहा

क्या मौजूदा मुख्यमंत्री के अपराध की जांच सीबीआई कर सकती है: ईडी ने न्यायालय से फैसला करने को कहा
Modified Date: August 18, 2026 / 10:36 pm IST
Published Date: August 18, 2026 10:36 pm IST

नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय से यह तय करने का आग्रह किया कि यदि कोई मौजूदा मुख्यमंत्री अपराध करता है, तो क्या केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) इसकी जांच कर सकता है या नहीं।

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कोलकाता में राजनीतिक सलाहकार फर्म आई-पैक के कार्यालय में आठ जनवरी को की गई तलाशी के दौरान पश्चिम बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उस वक्त के अन्य अधिकारियों द्वारा बाधा उत्पन्न की गई थी।

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने सुनवाई की शुरुआत में दलील दी कि चूंकि अब सरकार बदल गई है, इसलिए मुकदमा चलाने की मंजूरी देने और मामले को स्थानीय पुलिस को हस्तांतरित करने का अनुरोध राज्य सरकार द्वारा किया जा सकता है, इसलिए अब इस मामले में कुछ नहीं बचता है।

न्यायमूर्ति मिश्रा ने टिप्पणी की कि सरकार बदलने के बाद, कुछ भी नहीं बचा है और जांच को सीबीआई को हस्तांतरित करने की ईडी की अर्जी मंजूर करके मामले का निपटारा किया जा सकता है।

ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से अनुरोध किया कि बड़े मुद्दे पर फैसला किया जाना चाहिए।

मेहता ने कहा, ‘‘हम किसी भी आरोप का सामना नहीं करना चाहते हैं कि राज्य सरकार ने राजनीतिक कारणों से ऐसा किया है। भले हम सही हैं या गलत; मैं चाहता हूं कि अदालत फैसला करे। मैं मौत के जाल में नहीं फंसना चाहता, क्योंकि सरकार में बदलाव के बाद राज्य सरकार ने इसे सीबीआई को हस्तांतरित कर दिया।’’

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलील दी कि अदालत को यह तय करना होगा कि यदि कोई अपराध हुआ है तो क्या सीबीआई मौजूदा मुख्यमंत्री की जांच कर सकती है।

राजू ने कहा, ‘‘मुद्दा यह है कि क्या कोई मुख्यमंत्री, जो गृह मंत्री भी है, अगर कोई अपराध करती है, तो क्या यह सीबीआई के लिए जांच करने का उचित मामला है या नहीं?’’

शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई दो सितंबर को तय की है।

भाषा सुरेश दिलीप

दिलीप


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