सीबीआई ने सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को ठगने के आरोपी व्यक्ति को गिरफ्तार किया

सीबीआई ने सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को ठगने के आरोपी व्यक्ति को गिरफ्तार किया

सीबीआई ने सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को ठगने के आरोपी व्यक्ति को गिरफ्तार किया
Modified Date: July 19, 2026 / 09:32 pm IST
Published Date: July 19, 2026 9:32 pm IST

नयी दिल्ली, 19 जुलाई (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पशुपालन एवं डेरी विभाग का अधिकारी बनकर सरकारी योजना के तहत ऋण लेने वाले आवेदकों से रिश्वत मांगकर ठगी करने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों के अनुसार, आरोपी प्रभु दयाल पिछले लगभग तीन सप्ताह से गिरफ्तारी से बच रहा था। दयाल को उत्तर प्रदेश के आगरा जिला स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया गया।

सीबीआई ने उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के एक पोल्ट्री किसान की शिकायत के आधार पर 29 जून को मामला दर्ज किया था।

अधिकारियों ने बताया कि किसान ने भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) द्वारा संचालित उद्यमी मित्र पोर्टल के माध्यम से पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (एएचआईडीएफ) योजना के तहत 22.5 लाख रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया था।

शिकायत के अनुसार, आरोपी ने आवेदन मंजूर कराने के नाम पर 45,000 रुपये, यानी ऋण राशि का दो प्रतिशत, रिश्वत के रूप में मांगे थे।

प्राथमिकी दर्ज होने के कुछ ही घंटों बाद सीबीआई ने जाल बिछाया। इस दौरान आरोपी ने शिकायतकर्ता को यूपीआई भुगतान के लिए एक क्यूआर कोड भेजा और कथित तौर पर 5,000 रुपये की पहली किस्त रिश्वत के रूप में ली।

सीबीआई के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, ‘‘आरोपी ने 29 जून को शिकायतकर्ता के मोबाइल फोन पर क्यूआर कोड भेजकर 5,000 रुपये की पहली किस्त रिश्वत के रूप में स्वीकार की। क्यूआर कोड और बैंक खाते के विवरण के आधार पर सीबीआई ने 30 जून को एक निजी व्यक्ति को उसके घर से गिरफ्तार किया, लेकिन पूछताछ में पता चला कि वह मुख्य आरोपी नहीं था।’’

जांच के दौरान सीबीआई को पता चला कि मुख्य आरोपी के पास एएचआईडीएफ योजना के ऋण आवेदकों की जानकारी उपलब्ध थी। वह कथित तौर पर प्रतिदिन कई आवेदकों से संपर्क कर उनसे पैसे मांगता था और दावा करता था कि रिश्वत नहीं देने पर उनका आवेदन खारिज कर दिया जाएगा, लंबित रखा जाएगा या दोबारा जमा करना पड़ेगा।

बयान के अनुसार, आरोपी यूपीआई क्यूआर कोड भेजकर अन्य आवेदकों के बैंक खातों में पैसे मंगवाता था और बाद में उस रकम को यूपीआई लेनदेन के माध्यम से दूसरे लोगों के बैंक खातों में स्थानांतरित कर देता था।

भाषा शफीक नेत्रपाल

नेत्रपाल


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