सीबीआई ने आईडीएफसी बैंक में 550 करोड़ रुपये के गबन के सिलसिले में प्राथमिकी दर्ज की
सीबीआई ने आईडीएफसी बैंक में 550 करोड़ रुपये के गबन के सिलसिले में प्राथमिकी दर्ज की
नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने चंडीगढ़ स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हरियाणा सरकार के खातों से 550 करोड़ रुपये के कथित तौर पर गबन के मामले की जांच अपने हाथ में लेने के बाद प्राथमिकी दर्ज की है। आधिकारिक सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
सूत्रों ने बताया कि हरियाणा सरकार ने जांच केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी थी। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने बुधवार को यह मामला केंद्रीय जांच एजेंसी को भेजा था।
हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (एसवी एंड एसीबी) पहले इसकी जांच कर रहा था और सीबीआई ने इस मामले को अपने हाथ में लेते हुए प्राथमिकी दर्ज की।
हरियाणा के सतर्कता विभाग ने इस मामले को संबंधित एजेंसी को सौंपते हुए कहा, ‘‘यह मामला धोखाधड़ीपूर्ण बैंकिंग गतिविधियों और फर्जी लेनदेन से जुड़ा है, जिन्हें कथित तौर पर सरकारी धन को स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट, एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड, कैप को फिनटेक सर्विसेज, आर.एस. ट्रेडर्स और अन्य संबंधित फर्म/व्यक्तियों सहित फर्जी संस्थाओं (शेल) के खातों में अंतरित करने के लिए व्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया गया था, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।’’
सूत्रों ने बताया कि पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के आरोपों के अनुसार, हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा राज्य के कोष को बैंक में ‘सावधि जमा’ (एसएफडी) के रूप में जमा किया जाना था, लेकिन आरोपियों ने कथित तौर पर इसे अपने निजी उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल कर लिया।
सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि विभिन्न फर्जी (शेल) कंपनियों और छोटी आभूषण कंपनियों में भारी मात्रा में धनराशि अंतरित की गई है तथा अंततः सोने की खरीद और रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश के बहाने उसे निकाल लिया गया है।
उन्होंने कहा कि इस धन के लेन-देन में बड़ी मात्रा में नकदी निकासी भी देखी गई है।
सतर्कता विभाग के पत्र में कहा गया है कि मामले की व्यापकता, जटिलता और गंभीरता को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार का यह मानना है कि एक व्यापक, निष्पक्ष तथा विश्वसनीय जांच सुनिश्चित करने के मकसद से जांच को एक विशेष केंद्रीय एजेंसी को सौंपना आवश्यक है।
एसवी एंड एसीबी ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के दो पूर्व कर्मचारी और अन्य निजी व्यक्ति हैं।
चंडीगढ़ स्थित एक होटल व्यवसायी की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जो चंडीगढ़-मोहाली-पंचकुला में रियल एस्टेट परियोजनाओं के निर्माण में शामिल है।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने कहा था कि उसने हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों को मूलधन और ब्याज का 100 प्रतिशत भुगतान कर दिया है, जो कि 583 करोड़ रुपये बनता है।
भाषा यासिर माधव
माधव

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