सीबीएसई ओएसएम विवाद: कांग्रेस ने ‘उभरते घोटाले’ की सीबीआई जांच और प्रधान के इस्तीफे की मांग की
सीबीएसई ओएसएम विवाद: कांग्रेस ने ‘उभरते घोटाले’ की सीबीआई जांच और प्रधान के इस्तीफे की मांग की
नयी दिल्ली, 30 मई (भाषा) कांग्रेस ने शनिवार को आरोप लगाया कि सीबीएसई द्वारा कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं की योजना और कार्यान्वयन में ‘अक्षमता, भ्रष्टाचार और संवेदनहीनता का चौंकाने वाला मिश्रण’ व्याप्त है। कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और ‘उभरते घोटाले’ की सीबीआई जांच कराने की अपनी मांग को दोहराया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने दो जांचों का जिक्र किया (एक जांच केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के कक्षा 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत ने की है, तो दूसरी एक समाचार पत्र ने की है) और कहा कि इनसे कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा के लिए ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (ओएसएम) प्रणाली शुरू करने में सीबीएसई के इरादे और तैयारियों पर नए सवाल खड़े हुए हैं।
‘एक्स’ पर एक पोस्ट में रमेश ने मीडिया की खबरों का हवाला देते हुए 10 सवाल उठाए जिसमें उन्होंने कहा कि माता-पिता और छात्र प्रधानमंत्री मोदी से जवाब मांग रहे हैं, ‘जो सॉलिसिटर जनरल के अनुसार, व्यक्तिगत रूप से इस गड़बड़ी की निगरानी कर रहे हैं’।
रमेश ने पूछा कि सीबीएसई ओएसएम को लागू करने पर इतना अड़ा क्यों था कि उसने बोर्ड परीक्षाओं से 74 दिन पहले ही इस प्रक्रिया को जल्दबाजी में लागू कर दिया?
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सीबीएसई ने दिल्ली के पांच स्कूलों में ओएसएम को लेकर किये गए प्रयोगिक परीक्षण में कम से कम 36 तकनीकी, परिचालन और मूल्यांकन संबंधी चिंताओं को उठाया था, और पूछा कि परीक्षा से पहले इन चिंताओं पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
रमेश ने कहा, ‘‘सीबीएसई ने ओएसएम प्रणाली के ठेके के लिए तीन एफआरपी जारी कीं। तीसरी एफआरपी में खराब प्रदर्शन का पिछला रिकॉर्ड रखने वाले बोलीदाताओं को अयोग्य घोषित करने वाला प्रावधान क्यों हटा दिया गया? क्या यह तेलंगाना में पहले से ही ‘ब्लैकलिस्टेड’ सीओईएमपीटी को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया था?’’
एफआरपी (प्रस्ताव अनुरोध) एक दस्तावेज है जिसमें निविदा की शर्तों और नियम का ब्योरा होता है। उन्होंने आगे पूछा कि पहले से ब्लैकलिस्टेड बोलीदाताओं को प्रतिबंधित करने वाले प्रावधान को कमजोर करके इसे केवल वर्तमान में ब्लैकलिस्टेड बोलीदाताओं को ही बाहर करने तक क्यों सीमित किया गया?
रमेश ने पूछा, ‘‘क्या सीओईएमपीटी (जिसका तीन साल का औसत टर्नओवर 50.86 करोड़ रुपये था) को ठेके के लिए पात्र बनाने के लिए बोलीदाता के लिए न्यूनतम कंपनी टर्नओवर 50 करोड़ रुपये विशेष रूप से निर्धारित किया गया था?’’
उन्होंने ठेकेदारों के लिए क्षमता परिपक्वता मॉडल एकीकरण स्तर को स्तर पांच से स्तर तीन तक कम करने पर भी सवाल उठाया।
रमेश ने पूछा कि परियोजना के मानदंडों को अधिक छात्र संख्या से जुड़ा अनुभव रखने वाले बोलीदाताओं के मुकाबले छोटे और अलग-अलग विश्वविद्यालय के ठेके लेने वाले बोलीदाताओं को प्राथमिकता देने के लिए क्यों बदल दिया गया।
संचार विभाग के प्रभारी और कांग्रेस महासचिव रमेश ने कहा, “आरएफपी के प्रावधानों को क्यों बदला गया? पहले जिन ठेकेदारों के अपने डेटा सेंटर थे, उन्हें प्राथमिकता दी जाती थी, लेकिन अब इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा सूचीबद्ध डेटा सेंटर वाले ठेकेदारों को प्राथमिकता दी जा रही है। क्या यह टीसीएस (जिसके अपने डेटा सेंटर हैं) के मुकाबले व्यवस्थित तरीके से सीओईएमपीटी को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया था, जिसने एडब्ल्यूएस (इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा सूचीबद्ध) का इस्तेमाल किया? अगर ठेकेदार कोई गलती करते हैं तो सीबीएसई ने उन्हें ब्लैकलिस्ट करने का अपना अधिकार क्यों छोड़ दिया?’’
रमेश ने पूछा कि ‘स्कोर मैट्रिक्स’ की तकनीकी और परिचालन क्षमता को क्यों बदला गया ताकि बिखरे हुए छोटे ठेकेदारों को फायदा हो?
रमेश ने कहा, ‘‘यह बात स्पष्ट होती जा रही है कि सीबीएसई द्वारा कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की योजना बनाने और उन्हें लागू करने में अक्षमता, भ्रष्टाचार और संवेदनहीनता का चौंकाने वाला मिश्रण देखने को मिला। मंत्री प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए और इस ‘उभरते घोटाले’ की सीबीआई द्वारा पूरी जांच कराई जानी चाहिए।’’
भाषा संतोष माधव
माधव

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