सीईसी का इस्तीफा लोकतंत्र बहाली की दिशा में पहला कदम: कांग्रेस

सीईसी का इस्तीफा लोकतंत्र बहाली की दिशा में पहला कदम: कांग्रेस

सीईसी का इस्तीफा लोकतंत्र बहाली की दिशा में पहला कदम: कांग्रेस
Modified Date: September 28, 2026 / 12:15 pm IST
Published Date: September 28, 2026 12:15 pm IST

नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) कांग्रेस ने सोमवार को निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर खड़े हुए विवाद के बीच सोमवार को कहा कि देश में लोकतंत्र की बहाली की राह में पहला कदम मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि आयोग मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान नागरिकता निर्धारित करने के मामले में अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम कर रहा है।

रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि निर्वाचन आयोग का काम नागरिकता निर्धारित करना नहीं है। उन्होंने उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया के एक हालिया साक्षात्कार का हवाला देते हुए कहा कि नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 और संसद द्वारा समय-समय पर किए गए उसके संशोधनों के तहत होता है।

पूर्व न्यायाधीश धूलिया ने अंग्रेजी समाचार पत्र ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को दिए साक्षात्कार में कहा कि उच्चतम न्यायालय ने नागरिकता के संबंध में कई फैसलों में कानून की स्थिति स्पष्ट की है और ‘‘यह निर्वाचन आयोग का काम नहीं है।’’

रमेश ने कहा कहा कि मतदाता का भारतीय नागरिक होना जरूरी है, लेकिन नागरिकता निर्धारण का सवाल अलग है।

उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक पद पर बैठे मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने नागरिकता और अन्य मुद्दों पर संविधान का पूरी तरह उल्लंघन किया है।

रमेश ने विशेष रूप से नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में किए गए कथित बदलाव का उल्लेख किया और इसे ‘‘जेन जी मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने’’ वाला कदम बताया।

निर्वाचन आयोग ने हालांकि फॉर्म-6 को लेकर उठे विवाद पर कहा है कि मूल फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है और एसआईआर से संबंधित नया हिस्सा अलग अनुलग्नक के रूप में जोड़ा गया है।

रमेश ने कहा, ‘‘लोकतंत्र को बहाल करने की लंबी राह में पहला कदम मुख्य निर्वाचन आयुक्त का इस्तीफा है।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की ‘कुटिल जोड़ी’ के मोहरा हैं और वह ‘‘भारत के संविधान के लिए अपमान’’ हैं।

भाषा हक वैभव

वैभव


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