केंद्रीय सूचना आयोग ने डीओपीटी को यूपीएसएसी परिणामों में उपजाति ब्योरा शामिल करने का सुझाव दिया

केंद्रीय सूचना आयोग ने डीओपीटी को यूपीएसएसी परिणामों में उपजाति ब्योरा शामिल करने का सुझाव दिया

केंद्रीय सूचना आयोग ने डीओपीटी को यूपीएसएसी परिणामों में उपजाति ब्योरा शामिल करने का सुझाव दिया
Modified Date: May 5, 2026 / 05:36 pm IST
Published Date: May 5, 2026 5:36 pm IST

नयी दिल्ली, पांच मई (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को सुझाव दिया है कि सिविल सेवा परीक्षा की अंतिम सूचियों में उप-जाति संबंधी विवरण शामिल किए जाएं ताकि इस बात का बेहतर ढंग से आकलन हो सके कि आरक्षण नीति के लाभ विभिन्न जाति समूहों में कैसे वितरित किए जाते हैं।

यह सुझाव आरटीआई आवेदक की दूसरी अपील का निपटारा करते हुए दिया गया। अपील में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा 1995 में आयोजित परीक्षा के माध्यम से भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित उम्मीदवारों का जातिवार विवरण मांगा गया था।

सुनवाई के दौरान, विभाग ने सीआईसी को बताया कि सेवा आवंटन का डेटा केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग जैसी व्यापक सामाजिक श्रेणियों के स्तर पर ही रखा जाता है, उप-जाति स्तर पर नहीं। उसने यह भी कहा कि 1995 से पहले के रिकॉर्ड नहीं मिल पा रहे हैं।

विभाग के अधिकारी ने सीआईसी से कहा कि सीएसई-2017 और उसके बाद की परीक्षाओं के आधार पर सेवाओं के लिए आवंटित उम्मीदवारों की सूची (उनकी श्रेणी सहित) विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध है।

केंद्रीय सूचना आयोग ने कहा कि यद्यपि इस प्रकार का विस्तृत डेटा रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है, लेकिन भविष्य में जारी की जाने वाली जानकारियों में उपजाति संबंधी सूचना को शामिल किये जाने की ‘संभावना’ है।

उसने यह भी कहा कि हाल में हुई परीक्षाओं के लिए उम्मीदवारों की सूचियां, उनकी श्रेणियों सहित, पहले से ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं।

हालांकि, उसने इस बात पर जोर दिया कि सभी श्रेणियों के साथ-साथ उप-जाति संबंधी विवरण जोड़ने से यह सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है कि आरक्षण नीतियों के लाभ समुदायों की एक व्यापक और अधिक विविध श्रेणी तक पहुंचें।

केंद्रीय सूचना आयोग ने अपने आदेश में कहा, ‘‘उपरोक्त के आलोक में, आयोग विभाग को अनुशंसा करता है कि सीएसई के चयनित उम्मीदवारों की अंतिम सूची में समेकित जातिगत श्रेणियों (जैसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग आदि) के साथ-साथ उप-जाति विवरण भी शामिल किया जाए, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके और आरक्षण नीतियों और सकारात्मक कार्रवाई के लाभ व्यापक जातिगत श्रेणियों के भीतर अधिक व्यापक और विविध समुदायों तक पहुंच सकें।’’

सीआईसी ने इस मामले में आरटीआई अधिनियम के तहत अधिकारियों द्वारा दिए गए उत्तर में कोई कमी नहीं पाई एवं अपील का निपटारा कर दिया।

भाषा राजकुमार माधव

माधव


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