केंद्र ने आव्रजन और वीजा सेवाओं के आधुनिकीकरण के लिए योजना की अवधि पांच साल बढ़ाई

केंद्र ने आव्रजन और वीजा सेवाओं के आधुनिकीकरण के लिए योजना की अवधि पांच साल बढ़ाई

केंद्र ने आव्रजन और वीजा सेवाओं के आधुनिकीकरण के लिए योजना की अवधि पांच साल बढ़ाई
Modified Date: March 25, 2026 / 05:59 pm IST
Published Date: March 25, 2026 5:59 pm IST

नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आव्रजन, वीजा, विदेशी पंजीकरण एवं ट्रैकिंग (आईवीएफआरटी) योजना की अवधि को पांच साल के लिए बढ़ाने की बुधवार को मंजूरी दे दी।

इस योजना का उद्देश्य भारत में आव्रजन, वीजा जारी करने और विदेशियों के पंजीकरण से संबंधित कार्यों को आपस में जोड़ना एवं उन्हें सुव्यवस्थित करना है।

सरकार द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने 1,800 करोड़ रुपये के बजट आवंटन के साथ इस योजना को एक अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी।

बयान में बताया गया कि योजना का विस्तार केवल एक ‘तकनीकी उन्नयन’ नहीं, बल्कि एक रणनीतिक परिवर्तन है, जो विश्व-स्तरीय आव्रजन और वीजा जारी करने की प्रणाली के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय आवागमन को बढ़ावा देने के सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

बयान के मुताबिक, “हाल ही में लागू हुए आव्रजन एवं विदेशी अधिनियम, 2025 और इसके बाद के नियमों एवं आदेशों के बाद भविष्य में अवैध प्रवासन से जुड़ी उभरती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए आव्रजन, वीजा, विदेशी पंजीकरण एवं ट्रैकिंग प्रणाली को सुदृढ़ एवं आधुनिक बनाना अनिवार्य हो गया है।”

आईवीएफआरटी प्लेटफ़ॉर्म का उद्देश्य एक सुरक्षित, एकीकृत सेवा वितरण ढांचे के भीतर आव्रजन एवं वीजा सेवाओं का आधुनिकीकरण एवं उन्नयन कर भारत में आव्रजन, वीजा जारी करने व विदेशी पंजीकरण को जोड़ना एवं सुव्यवस्थित करना है।

आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति द्वारा 2010 में 1,011 करोड़ रुपये के बजट के साथ अनुमोदित यह योजना वैध यात्रियों को सुविधा प्रदान करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करती है।

इस परियोजना की प्रारंभिक अवधि सितंबर 2014 तक थी।

बयान में बताया गया, “परियोजना के लिए बजट आवंटन को 2015 में संशोधित कर 638.90 करोड़ रुपये कर दिया गया था, साथ ही इसके कार्यान्वयन की अवधि पहले 31 मार्च, 2017 तक और फिर 31 मार्च, 2021 तक बढ़ा दी गयी थी।’’

बयान के मुताबिक, मंत्रिमंडल ने अंतिम बार इस परियोजना को एक अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2026 तक जारी रखने के वास्ते 19 जनवरी 2022 को मंजूरी दी थी, जिसके लिए 1,365 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था।

भाषा जितेंद्र सुरेश

सुरेश


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