कॉरपोरेट को सस्ता श्रम उपलब्ध कराने के लिए केंद्र ने मनरेगा को बदला: मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी

कॉरपोरेट को सस्ता श्रम उपलब्ध कराने के लिए केंद्र ने मनरेगा को बदला: मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी

कॉरपोरेट को सस्ता श्रम उपलब्ध कराने के लिए केंद्र ने मनरेगा को बदला: मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी
Modified Date: January 8, 2026 / 07:48 pm IST
Published Date: January 8, 2026 7:48 pm IST

हैदराबाद, आठ जनवरी (भाषा) तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने ग्रामीण गरीबों से काम करने का अधिकार छीनकर बड़े कॉरपोरेट घरानों को सस्ते श्रम की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मनरेगा को ‘वीबी- जी राम जी’ से बदल दिया है।

मुख्यमंत्री ने यहां प्रदेश कांग्रेस पदाधिकारियों और अन्य नेताओं की एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवासन और बंधुआ मजदूरी को समाप्त कर दिया तथा ग्रामीण श्रमिकों को काम मांगने के लिए सशक्त बनाया।

रेवंत रेड्डी ने कहा, ‘‘आज, अदाणी, अंबानी जैसे बड़े उद्योगपतियों के लिए श्रमिक उपलब्ध नहीं हैं। अगर गांवों में (म)नरेगा को खत्म कर दिया गया, तो ग्रामीण गरीब फिर से शहरों की ओर पलायन करेंगे। जब गरीब फिर से शहरों में आएंगे, तो अदाणी, अंबानी को श्रमिक मिलेंगे। (प्रधानमंत्री) नरेन्द्र मोदी हमें ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी जैसी कंपनियों का गुलाम बनाने और बंधुआ मजदूर बनाने के लिए (महात्मा गांधी राष्ट्रीय) ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को खत्म करने की साजिश कर रहे हैं।’

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उनके मुताबिक, यह भाजपा द्वारा कॉरपोरेट कंपनियों के लिए की जा रही साजिश है।

उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस इन गरीब विरोधी कानूनों का उसी तीव्रता के साथ विरोध करेगी, जिस तीव्रता से उन तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन हुआ था, जिन्हें बाद में वापस ले लिया गया था।

योजना को लेकर कथित भ्रम की ओर इशारा करते हुए, मुख्यमंत्री रेड्डी ने ‘‘वीबी-जी राम जी’’ के आधार पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा, ‘‘यह विकसित भारत कहां है?’’

उन्होंने कहा, ‘‘आप (मोदी) संकट का भारत बना रहे हैं। आप गरीबों को बंधुआ मजदूर और गुलाम बनाने के लिए यह कानून लाये हैं।’ रेड्डी ने यह भी दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अल्पसंख्यकों, दलितों, आदिवासियों और गरीबों को मताधिकार से वंचित करने और यह सुनिश्चित करने की एक साजिश है कि वे बड़े कॉर्पोरेटों के अधीन बने रहें।

भाषा तान्या सुरेश

सुरेश


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